धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र के रूप में वामन अवतार लिया था. यह श्री हरि का पांचवां अवतार माना जाता है, जिसका उद्देश्य देवताओं के संकट को दूर करना और राजा बलि के अहंकार को समाप्त करना था. कथा के अनुसार, भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगकर संपूर्ण ब्रह्मांड और स्वर्ग लोक को नाप लिया था तथा तीसरा पग राजा बलि के मस्तक पर रखकर उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया. इस पावन तिथि पर भगवान वामन की प्रतिमा स्थापित कर पंचोपचार अथवा षोडशोपचार विधि से पूजन और व्रत करने का विधान है. मान्यता है कि इस दिन श्री हरि के मंत्रों के जप, कथा श्रवण और सफेद वस्तुओं के दान से अहंकार और पापों से मुक्ति मिलती है तथा खोई हुई प्रतिष्ठा और सुख-समृद्धि की पुनः प्राप्ति होती है.