भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह का जन्मोत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी का उद्धार किया था. इस दिन भगवान वराह और पृथ्वी माता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. पंचामृत से अभिषेक, पीले पुष्प, पीले वस्त्र और नैवेद्य अर्पित करने के साथ 'ॐ वाराहाय नमः' मंत्र का जाप किया जाता है. मान्यता है कि भगवान वराह की उपासना से संकट, पितृ दोष और वास्तु दोष दूर होते हैं तथा भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ मिलता है.