विजया एकादशी का व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. इस विशेष तिथि पर भगवान विष्णु की उपासना का विधान है. मान्यता है कि त्रेता युग में स्वयं भगवान श्री राम ने लंका विजय से पूर्व सागर तट पर इस व्रत को किया था, जिसके प्रभाव से उन्होंने रावण का अंत किया. इस दिन 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष फलदायी होता है. व्रत के दौरान तामसिक भोजन, चावल और बैंगन का त्याग करना चाहिए. शाम को आरती के बाद सात्विक आहार ग्रहण करें और अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन व दान देकर व्रत का पारण करें. यदि कोई शत्रुओं से परेशान है, तो उसे इस दिन शालिग्राम का पूजन और दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए.