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पूजा-पाठ और मंत्र जाप में 108 अंक ही क्यों है शुभ? जानें ग्रहों और नक्षत्रों से इसका गहरा कनेक्शन

सनातन धर्म में 108 के अंक को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों में 108 मनकों की माला का ही उपयोग किया जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है और पृथ्वी से सूर्य की दूरी भी सूर्य के व्यास की 108 गुना है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं, जिनका गुणनफल 108 आता है। इसी तरह 27 नक्षत्रों के चार चरणों का गुणनफल भी 108 ही होता है। योग विज्ञान के मुताबिक, मानव शरीर में 108 मुख्य नाड़ियां होती हैं जो हृदय चक्र में मिलती हैं। इसके अलावा उपनिषदों की संख्या 108 है और भगवान शिव के तांडव में 108 मुद्राएं शामिल हैं। जैन और बौद्ध धर्म में भी 108 अंक का विशेष महत्व बताया गया है। समुद्र मंथन के दौरान भी 54 देवता और 54 राक्षस यानी कुल 108 लोग शामिल थे। यही कारण है कि 108 को ब्रह्मांड की ऊर्जा और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।