साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस कारण यहां सूतक काल के नियम प्रभावी नहीं होंगे, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव व्यापक माना जा रहा है. कुंभ राशि और घनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला यह ग्रहण कई दुर्लभ संयोग बना रहा है. जानकारों के अनुसार, '37 साल बाद कुंभ राशि में पांच ग्रह (सूर्य, शुक्र, राहु, चंद्रमा और बुध) एक साथ गोचर करेंगे.' इसके अलावा 64 साल बाद कुंभ में सूर्य और राहु की युति हो रही है. ग्रहण का समय भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे से रात 7:57 बजे तक रहेगा. कार्यक्रम में मेष से लेकर मीन राशि तक पर पड़ने वाले प्रभावों और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई है. विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और मंदिर के कपाटों पर सूतक का असर नहीं होने की पुष्टि की गई है, फिर भी मंत्र जप और दान की सलाह दी गई है.