उत्तराखंड के चौबटिया फॉरेन ट्रेनिंग नोड में भारत और जापान की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन जारी है। 24 फरवरी से 9 मार्च तक चलने वाले इस अभ्यास में दोनों देशों के 120-120 जवान हिस्सा ले रहे हैं। भारत की ओर से लद्दाख स्काउट और जापान की ओर से 23वीं इन्फेंट्री रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। यह धर्म गार्डियन का सातवां संस्करण है जो 2018 से चल रहा है। अभ्यास का मुख्य फोकस अर्बन वॉरफेयर, आतंकवाद विरोधी अभियान, क्लोज कॉम्बैट, सर्च ऑपरेशन और इंटेलिजेंस संग्रह पर है। दोनों सेनाएं इंटरऑपरेबिलिटी, जॉइंट प्लानिंग और बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने पर काम कर रही हैं। यह अभ्यास भारत और जापान के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग का प्रतीक है।
जयपुर में इस होली पर मोहब्बत और भाईचारे का अनोखा रंग देखने को मिला जब ईरान और इजराइल के लोगों ने एक साथ होली खेली। विदेशी सैलानियों के लिए आयोजित होली समारोह में करीब 3000 से अधिक पर्यटक शामिल हुए जो 25 देशों से आए थे। इस आयोजन में 300 किलो गुलाल का इंतजाम किया गया। Travel agents के अनुसार होली के लिए हर साल 3 से 4 हजार के बीच विदेशी पर्यटक जयपुर आते हैं। जयपुर में दो दिन होली मनाई जा रही है। राजस्थान के पुष्कर, नागपुर में फूलों वाली इको फ्रेंडली होली, जगन्नाथ पुरी में डोल पूर्णिमा, गुजरात के बनासकांठा में अंगारों पर चलने की परंपरा, बरेली में 166 साल पुरानी राम बारात परंपरा और जयपुर के पारंपरिक गुलाल गोटे जैसी परंपराएं भी देश भर में निभाई गईं।
होली पर सौ साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है जब होलिका दहन के बाद चंद्र ग्रहण लगेगा और फिर होली का त्योहार मनाया जाएगा। साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि वालों को इस ग्रहण से विशेष लाभ होगा जबकि मीन, कुंभ और मेष राशि वालों को सावधानी बरतनी होगी क्योंकि इन पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ग्रहण से नौ घंटे पहले यानी सुबह 6:20 बजे सूतक काल शुरू हो जाएगा। सूतक काल में भोजन बनाना, सोना और नया काम शुरू करना वर्जित है लेकिन मंत्र जाप और पूजा-पाठ करना शुभ माना गया है। भारत में यह ग्रहण करीब 25 मिनट तक दिखाई देगा और इसे ब्लड मून भी कहा जा रहा है।
रंगभरी एकादशी के अवसर पर देशभर में होली के रंगोत्सव की औपचारिक शुरुआत हो गई है। काशी में बाबा विश्वनाथ और मां पार्वती की भव्य शोभायात्रा निकाली गई और हरिश्चंद्र घाट पर चिता भस्म की अनोखी होली खेली गई। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव मां पार्वती का गौना करवाकर काशी लाए थे और अपने गणों के साथ श्मशान की होली खेलते हैं। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में विश्व प्रसिद्ध फूलों वाली होली का आयोजन हुआ और मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। अयोध्या में हनुमानगढ़ी के साधु संतों ने पारंपरिक हुड़दंग होली खेली और पंचकोसी परिक्रमा के लिए रवाना हुए। परंपरा के अनुसार बजरंगबली की ओर से सभी देवी देवताओं को होली का निमंत्रण दिया गया। रंगभरी एकादशी से पांच दिवसीय होली पर्व की शुरुआत हो गई है।
ब्रज के रंगोत्सव के दूसरे दिन भगवान कृष्ण के नंदगांव में लट्ठमार होली का भव्य आयोजन हुआ. करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने इस अनोखी होली में हिस्सा लिया. परंपरा के मुताबिक बरसाने के हुरियारे नंदगांव पहुंचे और फगुआ लेने आए. नंद भवन में रसिया गीतों के साथ होली का आयोजन हुआ और फिर लट्ठमार चौक पर लट्ठमार होली खेली गई. देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में दिल्ली, दार्जिलिंग, नेपाल और काशी से लोग शामिल हुए। इस बीच काशी में मसान होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं. गंगा के घाटों पर भस्म से खेली जाने वाली मसान होली 28 फरवरी को मनाई जाएगी। इस साल होली से पहले चंद्रग्रहण लगने के कारण ज्योतिषियों के अनुसार होली 4 मार्च को मनाई जाएगी.
बरसाना की पावन धरती पर लट्ठमार होली का आयोजन हुआ जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। नंदगांव के होरियारों ने बरसाने की सखियों की लाठी झेली और जमकर होली खेली। राधा रानी के मंदिर से लेकर रंगीली गली तक गजब का माहौल रहा। होली के इस अनोखे उत्सव को देखने के लिए देश और विदेशों से बीस लाख लोग बरसाना पहुंचे। रंगीली गली और कुंज गलियों में बीस क्विंटल गुलाल उड़ाया गया और हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश हुई। दो सौ क्विंटल ठंडाई का इंतजाम किया गया था। यह परंपरा साढ़े पांच हजार साल पुरानी बताई जाती है जो राधा कृष्ण के प्रेम से जुड़ी है। होरियारों ने मुकुट पहनकर और ढाल लेकर लाठियां झेलीं। इस बीच दिल्ली के सदर बाजार में होली की तैयारियां जोरों पर हैं जहां स्वदेशी उत्पादों की धूम है। तलवार और त्रिशूल के आकार में नई पिचकारियां लोगों को लुभा रही हैं। चीनी उत्पादों की जगह मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ी है।
बरसाना में राधारानी मंदिर में लड्डू होली की शुरुआत हो गई है। श्रीजी मंदिर और रंगीली गली में रंग गुलाल उड़ाए गए और करीब बीस क्विंटल बूंदी के लड्डू प्रसाद के रूप में बांटे गए। नंदगांव से होली खेलने का निमंत्रण स्वीकार होने के बाद खुशी में यह उत्सव मनाया गया। गोस्वामी समाज द्वारा समाज गायन किया गया और भक्तों ने नाच गाकर होली मनाई। इस साल होली के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से कृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा को वस्त्र, रंग गुलाल और इत्र का उपहार भेजा गया है। यह प्रसाद रंग भरनी एकादशी यानी सत्ताईस फरवरी को भगवान श्री कृष्ण को अर्पित किया जाएगा। यह पहल सनातन में एकता और हरिहर भाव का प्रतीक बताई जा रही है। बुधवार को प्रसिद्ध लट्ठमार होली की तैयारियां भी पूरी हो गई हैं।
ब्रज में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। बरसाना में 24 और 25 फरवरी को लड्डूमार और लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने बरसाना की होली को राजकीय मेला घोषित किया है और रंगोत्सव 2026 का आगाज मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण करेंगे। इस बार होली में केमिकल रंगों की जगह टेसू के फूलों से बना प्राकृतिक रंग इस्तेमाल होगा। हजारों क्विंटल फूलों को उबालकर, इत्र, चंदन और खस मिलाकर यह रंग तैयार किया गया है। मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भक्त कृष्ण के साथ होली का आध्यात्मिक आनंद ले रहे हैं। बुंदेलखंड में ढोल, मंजीरे और पारंपरिक फागुनी गीतों के साथ होली मनाई जा रही है। महाराष्ट्र के अकोला में बड़े राम मंदिर में फूलों की होली खेली गई। जिला प्रशासन ने साठ से अधिक पार्किंग स्थल, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की है।
ब्रजभूमि में होली का उत्सव पूरे शबाब पर है। मथुरा के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर में 'समाज गायन' और 'रसिया' की गूंज के साथ श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हैं। यहाँ भगवान को गुलाल अर्पित करने के बाद उसे भक्तों पर प्रसाद स्वरूप उड़ाया जाता है। कार्यक्रम में बताया गया कि बरसाना में 25 फरवरी को विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जिसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी कर रहा है। इसके अलावा, इस बार प्राकृतिक रंगों पर जोर दिया जा रहा है। सहारनपुर की कान्हा उपवन गौशाला में गाय के गोबर से 'गौमय गुलाल' तैयार किया जा रहा है, जो पूरी तरह केमिकल मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल है। मथुरा में भी टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग बनाए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं की त्वचा सुरक्षित रहे।
विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना के बहुपक्षीय अभ्यास 'मिलन 2026' का भव्य आगाज हो गया है, जिसमें 70 से अधिक देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं. रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने उद्घाटन करते हुए कहा, 'No single navy however capable can address the challenge alone this is why cooperation in the navy no longer and often it is an imperative.' नौसेना प्रमुख Admiral Dinesh K Tripathi ने इस आयोजन को 'मैरीटाइम महाकुंभ' करार दिया. इस अभ्यास में आईएनएस विक्रांत पर तैनात मिग-29K फाइटर जेट्स, एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर्स और पी-8आई सर्विलांस विमानों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. पहली बार जर्मनी, फिलीपींस और यूएई की नौसेनाएं भी इस अभ्यास में शामिल हो रही हैं. यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.