सावन के पहले दिन देश के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा. उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक के साथ भगवान का भव्य शृंगार किया गया, जबकि काशी विश्वनाथ मंदिर और झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की. सावन की शुरुआत के साथ ही हरिद्वार से लेकर सुल्तानगंज तक कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है. लाखों शिव भक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो रहे हैं. बिहार और झारखंड जाने वाली ट्रेनों तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे जंक्शन जैसे प्रमुख स्टेशनों पर कांवड़ियों का भारी हुजूम देखा जा रहा है. भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क हैं. इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय से ड्रोन कैमरों के माध्यम से सीधी निगरानी की जा रही है.
भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा का समापन नीलाद्री विजय अनुष्ठान के साथ हुआ. बहुड़ा यात्रा, सुना वेष और अधर पाना की रस्मों के बाद तीनों देवताओं के विग्रहों को पहंडी यात्रा के माध्यम से श्रीमंदिर के गर्भगृह में रत्न सिंहासन पर दोबारा विराजमान कराया गया. परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के भाई-बहनों संग यात्रा पर जाने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो गई थीं और उन्होंने मंदिर का जय-विजय द्वार बंद कर दिया था. भगवान जगन्नाथ ने माता लक्ष्मी को मनाने के लिए पारंपरिक श्लोकों के जरिए संवाद किया और भेंट स्वरूप रसगुल्ला अर्पित कर उनका मान-मनौवल किया. इसके बाद माता लक्ष्मी का क्रोध शांत हुआ और मंदिर का द्वार खोल दिया गया. इस खास अवसर पर ओडिशा में रसगुल्ला दिवस मनाया जाता है. मंदिर में प्रभु को 'खीरा मोहन' यानी रसगुल्ले का विशेष भोग लगाया जाता है. भक्त इस अद्भुत धार्मिक अनुष्ठान और दुर्लभ दर्शन के साक्षी बने.
पुरी में भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा यात्रा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हो गई है. गुंडिचा मंदिर से चलकर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्रीमंदिर पहुंच चुके हैं. यात्रा के दौरान गजपति महाराज के महल के सामने भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ रुका, जहां देवी लक्ष्मी और महाप्रभु का दिव्य मिलन यानी 'लक्ष्मी नारायण भेंट' अनुष्ठान संपन्न हुआ. इसके बाद नंदीघोष रथ को भी सिंहद्वार पहुंचाया गया. बहुड़ा यात्रा के बाद भी धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहेगा. अगले दिन सुनावेश की परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें तीनों विग्रहों को अलौकिक स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाएगा. इसके बाद अधर पाना और नीलाद्री बीजे अनुष्ठान पूरा होने पर महाप्रभु अपने धाम के मुख्य मंदिर में पुन: विराजमान होंगे.
जगन्नाथ पुरी में नवमी के संध्या दर्शन के बाद बहुड़ा यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। गुंडिचा मंदिर से वापसी की यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा मौसी मां के मंदिर ठहरेंगे, जहां उन्हें विशेष पोड़ा पीठा का भोग अर्पित किया जाएगा। यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए 50 कंपनियां, ड्रोन्स और 400 से अधिक एआई सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए हैं। उधर, कांवड़ यात्रा के बीच आस्था और पारिवारिक समर्पण की अनोखी तस्वीर सामने आई है, जहां दिल्ली के शाहदरा निवासी मनीष चौधरी अपनी 90 वर्षीय दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से जल ला रहे हैं। वहीं सहारनपुर में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिल रही है, जहां मुस्लिम कारीगर दिन-रात शिव भक्तों के लिए विशेष परिधान तैयार कर रहे हैं।
पुरी की रथयात्रा अपने अंतिम चरण में है. 24 जुलाई को गुंडिचा मंदिर से बाहुड़ा यात्रा शुरू होगी और तीनों रथ श्रीमंदिर की ओर लौटेंगे. इससे पहले दक्षिण मोड़ा परंपरा के तहत नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों की दिशा बदली गई. पहियों और अन्य हिस्सों की जांच तथा मरम्मत पूरी की गई है. बाहुड़ा यात्रा के दौरान करीब पंद्रह सौ पुलिसकर्मी, बचाव दल, जल व्यवस्था और चिकित्सा टीमें तैनात रहेंगी. यात्रा पहंडी रस्म से शुरू होगी और मौसी मां मंदिर में पड़ाव के बाद श्रीमंदिर पहुंचेगी. दूसरी ओर, लगातार बारिश के कारण वैष्णो देवी यात्रा और अमरनाथ यात्रा रोकी गई है. कटरा, जम्मू और आधार शिविरों में श्रद्धालु मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. प्रशासन ने यात्रियों के ठहरने, भोजन, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की है. सुरक्षित रास्ते की पुष्टि के बाद यात्राएं दोबारा शुरू की जाएंगी.
पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का पहला चरण पूरा हो गया है। बारिश और सूर्यास्त के कारण रुकी यात्रा अगले दिन सुबह फिर शुरू हुई और भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अब भगवान सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगे। लगातार बारिश के कारण पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' का वजन बढ़ने से इस बार भगवान बिना ताहिया के नजर आए। पुरी के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी रथयात्रा की धूम रही। दिल्ली के द्वारका इस्कॉन मंदिर में 11 हजार किलो आम का विशेष भोग लगाया गया। वहीं, जयपुर में करीब 250 साल पुरानी परंपरा बदलते हुए पहली बार तीनों भगवान अलग-अलग रथों पर विराजमान हुए, जहां महिलाओं ने सुरक्षा संभाली। उदयपुर में 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ और 95 किलो चांदी के रथ का उपयोग किया गया। प्रयागराज में भी भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण पर निकले, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई. पुरी में भारी बारिश के बावजूद करीब 10 लाख श्रद्धालु इस भव्य यात्रा में शामिल हुए. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को रथों में विराजमान कर गुंडिचा मंदिर की ओर ले जाया गया. पुरी के गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से 'छेरा पहरा' की रस्म निभाई. इस मौके पर कई राजनेता और मशहूर हस्तियां भी मौजूद रहीं. अहमदाबाद में 149वीं रथयात्रा निकाली गई, जो 16 किलोमीटर लंबी थी. राज्य के मुख्यमंत्री ने 'पहिंद विधि' पूरी कर यात्रा को रवाना किया, जबकि केंद्रीय गृहमंत्री मंगला आरती में शामिल हुए. सुरक्षा के लिए 30 हजार से अधिक जवान और 100 से ज्यादा ड्रोन तैनात किए गए. जयपुर में 250 साल की परंपरा में पहली बार तीन अलग-अलग रथ निकाले गए. वहीं, उदयपुर में भगवान जगन्नाथ को रजत रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया, जिसमें राजपरिवार के सदस्य भी शामिल हुए.