आज बात निर्जला व्रत की, जो साल भर की एकादशी का पुण्य दे सकता है. भीषण गर्मी, तपता सूरज और गले को सुखा देने वाली प्यास..लेकिन आस्था ऐसी कि भक्त पूरे दिन जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते. यह है निर्जला एकादशी का महाव्रत, जिसे सनातन परंपरा में तप, त्याग और आत्मसंयम की सर्वोच्च साधना माना गया है. मान्यता है कि इस एक व्रत का पुण्य वर्षभर की सभी एकादशियों के समान फलदायी होता है. निर्जला का अर्थ है बिना जल के रहना अर्थात इस व्रत में न तो जल ग्रहण करते हैं और न ही भोजन...ये व्रत भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. सब एकादशी में इसे काफी अहम माना जाता है. इस दिन स्नान, दान का बड़ा महत्व है. कहते हैं इस दिन व्रत उपवास और हरि कीर्तन से महापुण्य की प्राप्ति होती है.