77वें गणतंत्र दिवस परेड 2026 की तैयारियां कर्तव्य पथ पर जोरों से चल रही हैं. इस वर्ष की परेड 'स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम और समृद्धि का मंत्र आत्मनिर्भर भारत' की थीम पर आधारित है. इसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता और सात स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया जाएगा. पहली बार सेना के 'मूक योद्धा' जैसे शिकारी बाज, दो कूबड़ वाले बैक्टीरियन ऊंट और रोबोटिक म्यूल्स शामिल होंगे. ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश तीर और स्वदेशी 'अटैक्स' तोपों के साथ भारतीय नौसेना की झांकी में आईएनएस विक्रांत और मराठा नौसेना के 'गुराब' जहाज के मॉडल दिखेंगे. नौसेना की झांकी 'विरासत की शक्ति से आत्मनिर्भरता का संकल्प' विषय पर केंद्रित है.
प्रयागराज के माघ मेले में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंदगिरी का अनाज और सिक्कों से भव्य तुला दान संपन्न हुआ, जिसे जरूरतमंदों में वितरित किया जाएगा. मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 20 इलेक्ट्रिक बग्गीयां संचालित हैं, वहीं कौशंबी के दिनेश तिवारी कीलों के आसन पर तपस्या कर रहे हैं. अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ती भीड़ के बीच ओडिशा से 235 किलो का पंचधातु रामधनुष भेजा गया है. अहमदाबाद के अंबाजी मंदिर में एक श्रद्धालु ने स्वर्ण शिखर हेतु 72 लाख रुपये का सोना दान किया है. साथ ही, यहाँ उत्तरकाशी के ऐतिहासिक त्रिशूल की प्रतिकृति के रूप में 16 फीट ऊंचा और 600 किलो वजनी 'अखंड शक्ति त्रिशूल' स्थापित किया गया है. गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली के कर्तव्य पथ पर परेड रिहर्सल जारी है.
प्रयागराज के माघ मेले में 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया. इस दौरान 1946 से संचालित 'भूले भटके शिविर' बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाने का कार्य कर रहा है. मेले में श्री अघोरेश्वर धाम की शोभायात्रा, किन्नर अखाड़े में मां कामाख्या साधना और इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया की उपस्थिति प्रमुख रही. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और अगला स्नान 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर होगा. दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के विधायक गोपाल भार्गव ने अपने सरकारी बंगले को 70 बिस्तरों वाले सेवा केंद्र में बदलकर मरीजों के लिए मुफ्त भोजन और इलाज की व्यवस्था की है. बांदा में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दरबार में रूसी अनुयायियों ने शिरकत की. दिल्ली में गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल के तहत 30 झांकियां और सैन्य टुकड़ियां अभ्यास कर रही हैं. उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है.
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का प्रकोप जारी है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 16 जनवरी से सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा में 20 जनवरी तक बर्फबारी की संभावना है. दिल्ली में कम दृश्यता के कारण यातायात और उड़ानें प्रभावित हुई हैं. लद्दाख के द्रास में -50 डिग्री तापमान के बीच भारतीय सेना के जवान योग और सूर्य नमस्कार कर रहे हैं. इसी बीच, दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में मंडी हाउस की संजना तिवारी युवाओं को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से स्टॉल संभाल रही हैं. दूसरी ओर, बिहार के मोतिहारी स्थित विराट रामायण मंदिर में 17 जनवरी को 210 टन वजनी और 33 फीट ऊंचे विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना की जाएगी. इस कार्यक्रम में कैलाश मानसरोवर के जल से जलाभिषेक होगा, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल होने की संभावना है. जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी भारी हिमपात का पूर्वानुमान है.
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. कड़ाके की ठंड के बावजूद, लाखों श्रद्धालु संगम में 'पुण्य की डुबकी' लगा रहे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों पर इस मेले को 'मिनी महाकुंभ' की तर्ज पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है. पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है, जिसके लिए एटीएस, एसटीएफ, आरएएफ और पीएसी के जवान तैनात हैं. साथ ही, एआई-इनेबल्ड कैमरों और ड्रोन सिस्टम से निरंतर निगरानी की जा रही है. वाराणसी और हरिद्वार में भी गंगा स्नान के लिए भारी भीड़ है. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी अपने आवास पर गायों को चारा खिलाते हुए तस्वीरें सामने आईं. प्रशासन आगामी मुख्य स्नानों, जैसे मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी, के लिए पूरी तरह से तैयार है.
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देशभर के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. प्रयागराज, हरिद्वार और वाराणसी में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा गया, जहां कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई. अकेले प्रयागराज के संगम तट पर स्नान करने वालों का आंकड़ा 30 लाख के पार पहुंच गया, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पूरे मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया है. ज्योतिषी संजय शर्मा के अनुसार, इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर में प्रवेश करते हैं, जिससे उनका तेज और प्रभाव बढ़ जाता है. इस वर्ष षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग भी बना, जिसने इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा दिया. यह सूर्य गोचर मेष से मीन तक सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा, जिससे कुछ को धन लाभ तो कुछ को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है. 'ओम घृणी सूर्याय नमः' मंत्र के जाप और दान-पुण्य को इस दिन विशेष फलदायी माना गया है.
उत्तर भारत में लोहड़ी उत्सव की धूम के बीच मकर संक्रांति की तैयारियों और प्रयागराज में माघ मेले को लेकर हलचल तेज हो गई है. पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों में लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके बाद 15 जनवरी को मकर संक्रांति का स्नान-दान शुभ माना जा रहा है. इस अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान है. 850 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत 10,000 पुलिसकर्मी, ड्रोन और एआई-आधारित कैमरे तैनात किए गए हैं. भीड़ प्रबंधन के लिए क्यूआर कोड और खोया-पाया केंद्र भी बनाए गए हैं. यह सब उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच हो रहा है.
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में आस्था के कई रंग देखने को मिल रहे हैं, जहाँ पहली बार वैष्णव अखाड़ों का अमृत स्नान आयोजित होगा. मेले में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त रंजीत सिंह, जो 20 वर्षों से केवल फलाहार पर हैं और सिर पर जौ उगाकर हरियाली का संदेश देने वाले 'अनाज वाले बाबा' अमरजीत योगी जैसे कल्पवासी अपनी कठोर साधना से चर्चा में हैं. दूसरी ओर, उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड जारी है, जिसके बीच दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल चल रही है. मकर संक्रांति पर गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव भी आयोजित किया गया.
गुजरात के सोमनाथ मंदिर में महमूद गजनवी के हमले के 1,000 साल पूरे होने के अवसर पर 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में 3,000 ड्रोन का एक शो और 72 घंटे का अखंड ओम जाप शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. वहीं, देश में मकर संक्रांति 2026 की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है. सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन एकादशी होने के कारण, जानकारों ने 17 जनवरी को खिचड़ी पर्व मनाने को शुभ बताया है. इसी के साथ, प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में 'अमृत स्नान' की तैयारियां भी तेज हो गई हैं, जहां संतों ने शाही स्नान की रूपरेखा तैयार की है. इन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा, जयपुर में 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी और लास वेगास में सीईएस 2026 में प्रदर्शित हो रहे एआई गैजेट्स भी चर्चा का विषय बने हुए हैं.
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर जारी है. कश्मीर में तापमान शून्य से पांच डिग्री नीचे लुढ़क गया है, जिससे नदी-नाले जमने लगे हैं. दिल्ली-एनसीआर में घने कोहरे के कारण मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि मैदानी इलाकों में शीत लहर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ठंड का असर यूरोप के कई देशों में भी दिख रहा है, जहाँ भारी बर्फबारी हो रही है. इस बीच, चिड़ियाघरों में जानवरों को ठंड से बचाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. दूसरी ओर, गुजरात के सोमनाथ में 1000 साल पूरे होने पर 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को शामिल होंगे. हिमाचल में आरटीओ सोना चंदेल ने अपनी ही गाड़ी का चालान काटकर ईमानदारी की मिसाल पेश की है. वहीं, प्रयागराज के माघ मेले से महंत रामदास ने भारतीय ऋषि परंपरा पर प्रकाश डाला और झांसी की कराटे चैंपियन ओजस्वी व नैवेदी ने देश का नाम रोशन किया है.
देश भर में आस्था और संस्कृति के विविध रंग दिख रहे हैं. प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है, जहाँ कुछ साधु साधना में लीन हैं तो कुछ अपने विशेष रूपों से आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इस वर्ष मेले में श्रद्धालुओं के लिए वाटर स्पोर्ट्स और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी नई सुविधाओं की भी शुरुआत की गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल के गंगासागर में भी मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं. मान्यता है कि यहाँ डुबकी लगाने से 100 अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है. एक ओर जहाँ इन मेलों में आस्था का उल्लास है, तो दूसरी ओर उत्तर भारत के पहाड़ी इलाके, विशेषकर कश्मीर और हिमाचल, कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की चपेट में हैं.