उत्तर प्रदेश के बरेली में आठवीं कक्षा के छात्र ने अपनी सूझबूझ से माता-पिता को 'डिजिटल अरेस्ट' और लाखों की साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया. ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर दंपति को 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाए रखा और आतंकवादी कनेक्शन का डर दिखाकर बैंक विवरण मांगे. छात्र ने संदेह होने पर मोबाइल को फ्लाइट मोड पर डाल दिया, जिससे ठगों का संपर्क टूट गया. इस घटना के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए 10,000 रुपये से अधिक के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर एक घंटे की देरी लागू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती है. सुरक्षित रहने के लिए संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने और केवाईसी नियमों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है.