सावन के दूसरे सोमवार और सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. वाराणसी के काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, देवघर के बैद्यनाथ धाम और गुजरात के सोमनाथ मंदिर में तड़के से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम जारी है. दिल्ली, प्रयागराज, हरिद्वार, जयपुर और मुंबई के शिवालयों में भी भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं. इस बार सावन के दूसरे सोमवार और सावन शिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग, गजकेसरी योग, सिद्ध योग तथा पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र का विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यता अनुसार सावन का दूसरा सोमवार आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान शिवलिंग पर कमल पुष्प, बेलपत्र, शमी पत्र अर्पित करने और निशिता काल तथा गोधूलि बेला में गन्ने का रस या गंगाजल से जलाभिषेक करने का विधान है. श्रद्धालु मानसिक पूजन और ॐ नमः शिवाय का जाप कर महादेव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात सरकार ने एनालॉग पनीर, चीज और बटर के उत्पादन, बिक्री, भंडारण तथा परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है. बिना दूध के वनस्पति तेल, पाम ऑयल, स्टार्च और रसायनों से निर्मित यह एनालॉग पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है. महाराष्ट्र में इसके उल्लंघन पर छह महीने की जेल और 1 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं गुजरात, भोपाल, जामनगर और राजकोट में खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) और FDCA की टीमें विशेष अभियान चलाकर अवैध स्टॉक सील कर रही हैं. विशेषज्ञों और न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार ऐसे नकली उत्पादों के सेवन से दिल की बीमारियां, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम रहता है. असली पनीर मुलायम और प्राकृतिक खुशबू वाला होता है, जबकि एनालॉग पनीर चिपचिपा और फीका होता है. खाद्य सुरक्षा कानून (FSS Act) के तहत सही लेबलिंग, रैपिड टेस्टिंग, प्यूरिटी टेस्ट और स्ट्रीट फूड व ऑनलाइन डिलीवरी के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
सावन के पहले सोमवार के अवसर पर देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्ज की गई. काशी विश्वनाथ, अयोध्या के नागेश्वर मंदिर, मुंबई के बाबुलनाथ और दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में भक्तों ने शिवलिंग का विधि-विधान से जलाभिषेक किया. काशी विश्वनाथ धाम में पारंपरिक रूप से स्थानीय यादव बंधुओं ने गंगा स्नान के उपरांत बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक संपन्न किया. इस दौरान आयोजित विशेष धार्मिक चर्चा में धर्मगुरुओं और ज्योतिषियों ने सावन माह, ज्योतिर्लिंगों के धार्मिक महत्व और शिव पूजन की विधि की जानकारी दी. चर्चा में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ, मल्लिकार्जुन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथाओं का वर्णन किया गया. इसके साथ ही भगवान शिव की उपासना में बेलपत्र, जल, पंचामृत, अक्षत और धतूरे के महत्व को रेखांकित किया गया. जानकारों ने बताया कि इस बार सावन में चार सोमवार के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. कार्यक्रम में सावन के सोमवार व्रत के नियम, विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक के विधान तथा सावन माह के प्राकृतिक, वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर विवरण प्रस्तुत किया गया.
एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करने के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है. भारत में एआई से सर्वाधिक 7.9 प्रतिशत सवाल शिक्षा और बच्चों के होमवर्क से संबंधित पूछे जाते हैं. इसके अलावा बिजनेस ऑप्शंस, वेब डेवलपमेंट, कोडिंग, ग्राफिक्स, मैथ्स और नए इनोवेशन के क्षेत्रों में भी एआई टूल्स का प्रयोग बढ़ रहा है. अमेरिका में बिजनेस ऑप्शंस से जुड़े सवाल शीर्ष पर हैं. एक विशेष चर्चा के दौरान टेक एक्सपर्ट्स ने एआई के फायदों और उससे जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण किया. विशेषज्ञों के अनुसार एआई शिक्षा प्रणाली, स्किल डेवलपमेंट और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में सहायक है, लेकिन डेटा की सटीकता को लेकर ह्यूमन इंटरवेंशन और फैक्ट-चेक आवश्यक है. एआई पर अत्यधिक निर्भरता से बच्चों की मौलिक सोच, व्यावहारिक समझ और सोचने की क्षमता पर असर पड़ रहा है. कार्यक्रम में नौकरियों के नुकसान, निजता, साइबर सुरक्षा के जोखिम और इंसानों जैसे व्यवहार करने वाले एआई मॉडल्स पर चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर भी चर्चा की गई.
सावन मास की शुरुआत के साथ देशभर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, देवघर के बैद्यनाथ धाम और हरिद्वार में हर-हर महादेव के जयकारों के साथ जल चढ़ाने की प्रक्रिया जारी है. इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे और 28 अगस्त तक यह पावन अवधि रहेगी. काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छह प्रवेश द्वार, ओआरएस काउंटर, सीसीटीवी निगरानी और वीआईपी दर्शन पर रोक के नियम लागू किए गए हैं. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. शास्त्रानुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का निश्चित क्रम निर्धारित है, जिसमें गणेश जी, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और नाग देवता के बाद अंत में शिव जी पर जल चढ़ाया जाता है. तांबे के पात्र में दूध अर्पण वर्जित होने के कारण पीतल के पात्र का उपयोग किया जाता है. साथ ही विभिन्न राशियों के लिए बेलपत्र, पंचामृत व जलाभिषेक के विशेष विधान भी शामिल हैं.
ओडिशा के पुरी में 12 दिनों तक चले प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक समापन नीलाद्री विजय रस्म के साथ हो गया है. आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन महाप्रभु गुंडिचा मंदिर से अपने मुख्य धाम श्रीमंदिर में पुनः वापस लौट आए हैं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यात्रा के दौरान साथ न ले जाने के कारण रुष्ट हुईं माता लक्ष्मी का मान-भंजन करने के लिए गर्भगृह में प्रवेश से पूर्व महाप्रभु जगन्नाथ उन्हें पारंपरिक रसगुल्ला भेंट करते हैं. इस दौरान विशेष पहंडी बीजे अनुष्ठान का आयोजन किया गया. विद्वानों और आचार्यों के अनुसार यह लीला पारिवारिक जीवन में मधुरता, प्रेम और विनम्रता से मनमुटाव सुलझाने का संदेश देती है. वापसी यात्रा के समय पुरी में बारिश भी हुई, जिसे श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद माना. इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बहुड़ा यात्रा यानी महाप्रभु की वापसी यात्रा का शुभारंभ हो चुका है. आठ दिनों तक मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने धाम श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. इस पवित्र यात्रा के साक्षी बनने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं. सुरक्षा व्यवस्था के तहत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. बहुड़ा यात्रा के दौरान अगले चार दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. इनमें रथों पर विराजमान होना, सुना वेशा यानी स्वर्ण अवतार दर्शन, अधर पाना और अंत में नीलाद्री विजय शामिल है. नीलाद्री विजय के दिन महाप्रभु जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाने के लिए रसगुल्ले का प्रसाद लेकर श्रीमंदिर में गृह प्रवेश करेंगे. इसके अलावा अलवर, गुवाहाटी और हुगली जैसे शहरों में भी जगन्नाथ उत्सव की परंपराएं मनाई जा रही हैं.
सिडनी यूनिवर्सिटी और मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर तेजी से घट रहा है. 82 देशों के डेटा पर आधारित इस शोध में भारत की स्थिति सर्वाधिक चिंताजनक है. रिपोर्ट 2035 तक इस संकट के गहराने की चेतावनी देती है. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मुख्य कारणों में दवाओं का अनावश्यक उपयोग, अधूरा कोर्स, बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री और ऑनलाइन फार्मेसियों द्वारा डमी पर्ची का इस्तेमाल शामिल है. पोल्ट्री फार्म और कृषि के जरिए यह रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहा है, जबकि पीएम 2.5 प्रदूषण हवा से रेजिस्टेंट बैक्टीरिया फैला रहा है. आईसीएमआर की रिपोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसके अंधाधुंध इस्तेमाल पर चिंता जताई है. दिल्ली जैसे शहरों में 'सुपरबग' का खतरा बढ़ गया है, जिन पर दवाएं बेअसर हैं. विशेषज्ञों ने इसे मेडिकल साइंस का परमाणु बम बताते हुए स्पष्ट किया है कि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करना चाहिए. इस संकट से बचने के लिए सख्त नियमों और 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण की आवश्यकता है.
दिल्ली की एक कामकाजी महिला द्वारा 48 लाख रुपये सालाना कमाने वाले युवक का विवाह प्रस्ताव ठुकराने से शादी, करियर और लैंगिक अपेक्षाओं पर बहस शुरू हुई. महिला ने यह प्रस्ताव इसलिए ठुकराया क्योंकि युवक के परिवार ने शादी के बाद नौकरी छोड़ने की शर्त रखी थी. कार्यक्रम में विवाह सलाहकार, वकील और सामाजिक कार्यकर्ताओं के पैनल ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और पहचान पर चर्चा की. चर्चा में संयुक्त और एकल परिवारों में बच्चों की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियों के बंटवारे और विवाह-पूर्व काउंसलिंग की आवश्यकता पर बात हुई. पैनल ने स्पष्ट किया कि नौकरी जारी रखने या छोड़ने का निर्णय परिवार के दबाव के बजाय पति-पत्नी की आपसी सहमति से होना चाहिए. कार्यक्रम के दूसरे भाग में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी की जापान ओपन सुपर 750 जीत की रिपोर्ट दिखाई गई. इसमें जापानी प्रतिद्वंद्वी पर फाइनल जीत, दो साल से अधिक के खिताबी इंतजार की समाप्ति, फिटनेस, नेट गेम, लंबी रैलियों, डेटा विश्लेषण और एक भारतीय क्रिकेटर से मिली सलाह का उल्लेख किया गया.
सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में लागू किए गए थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला (Three-Language Formula) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस नियम को कक्षा 9 के बजाय कक्षा 6 से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव न पड़े. साथ ही, स्पष्ट किया गया कि तीसरी भाषा के रूप में हिंदी की जगह संस्कृत भी चुनी जा सकती है. नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इस नियम पर अभिभावकों और शिक्षाविदों में बहस छिड़ गई है. कुछ अभिभावक बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) या जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सिखाने के पक्ष में हैं, जो वैश्विक करियर के अवसर प्रदान करती हैं. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है जो तार्किक क्षमता बढ़ाती है. इस बीच, स्कूलों ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का केवल आंतरिक मूल्यांकन होगा.
ओडिशा के पुरी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू हो चुकी है. इस पावन अवसर पर 'गुड न्यूज टुडे' 200 घंटे की महाकवरेज लेकर आया है. भारी बारिश के बीच पुरी में लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए उमड़े हैं. यात्रा से पूर्व गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से रथों का रास्ता साफ करने की पारंपरिक 'छेरा पहरा' रस्म निभाई. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा क्रमशः 'नंदीघोष', 'तालध्वज' और 'दर्पदलन' रथों पर सवार होकर गुंडीचा मंदिर प्रस्थान करते हैं, जहां वे 10 दिन विश्राम करते हैं. इन रथों के निर्माण में किसी धातु या कील का उपयोग नहीं होता है. पुरी के अलावा नोएडा, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद में भी रथ यात्रा निकाली जा रही है. संतों और विशेषज्ञों ने इस पावन यात्रा से जुड़ी प्राचीन परंपराओं और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इस ऐतिहासिक महायात्रा में भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर जाते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा को लेकर प्रशासन ने ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यात्रा भगवान के कर्मवेदी से जन्मवेदी की ओर जाने का प्रतीक है, जहां वे सात दिनों तक विश्राम करेंगे. इस दौरान मंगला आरती, खिचड़ी भोग सहित कई पारंपरिक अनुष्ठान निभाए जाएंगे. यात्रा के दौरान हेरा पंचमी जैसी महत्वपूर्ण परंपराएं भी पूरी की जाएंगी, जिसमें माता लक्ष्मी के क्रोधित होने और रथ का हिस्सा तोड़ने का विधान है. इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है, जो भगवान के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संबंध में एक फैसला सुनाया है. अदालत के अनुसार, यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने का वादा पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर की गई संपत्ति को वापस लिया जा सकता है. मुंबई के लोअर परेल के एक कारोबारी बेटे द्वारा देखभाल न करने पर बुजुर्ग दंपति को अपना फ्लैट छोड़ना पड़ा था. सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ बेटे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. बेटे का तर्क था कि उसके माता-पिता आर्थिक रूप से संपन्न हैं. हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति मायने नहीं रखती, बल्कि देखभाल का वादा पूरा होना जरूरी है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007' बुजुर्गों को सुरक्षा प्रदान करता है. विशेषज्ञों ने बुजुर्गों को जीते जी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के बजाय वसीयत (Will) बनाने की सलाह दी है.
11 और 12 जुलाई को वर्ष का आखिरी विवाह मुहूर्त है, जिसके बाद देवशयनी एकादशी से चार महीने के लिए चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है. इस अवधि में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस काल में देवगुरु बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और शनि देव वक्री चाल चलेंगे, जिसके कारण नया व्यवसाय शुरू करने या बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान पत्तेदार सब्जियां, दही और बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि पूजा-पाठ, दान और भगवान शिव, दुर्गा व गणेश की आराधना का विशेष महत्व है. आगामी नवंबर माह में देवउठनी एकादशी के बाद ही सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे. तब तक केवल दान, ध्यान, मंत्र जाप और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.
आनंदीबेन पटेल की युवतियों को विवाह से पहले आत्मनिर्भर बनने की सलाह पर केंद्रित इस विशेष चर्चा में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है. शादी और करियर के बीच सही तालमेल बिठाना वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. कार्यक्रम में इस बात पर गहराई से मंथन किया गया कि महिलाओं के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र होना क्यों आवश्यक है. हालांकि, करियर बनाने की इस होड़ में शादी की उम्र बढ़ने से कई नई पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आज की महिलाएं ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उनकी स्वतंत्रता और संघर्षों का सम्मान करे. चर्चा के दौरान शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर मौजूद रूढ़िवादी धारणाओं और विवाह पूर्व काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया. यह वीडियो बदलते दौर में रिश्तों को संभालने, आत्मनिर्भरता की मांग और समाज की सोच में आवश्यक बदलाव को प्रदर्शित करता है.