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ये हुई ना बात

सेवा नहीं तो संपत्ति भी नहीं, बुजुर्ग माता-पिता को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

10 जुलाई 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संबंध में एक फैसला सुनाया है. अदालत के अनुसार, यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने का वादा पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर की गई संपत्ति को वापस लिया जा सकता है. मुंबई के लोअर परेल के एक कारोबारी बेटे द्वारा देखभाल न करने पर बुजुर्ग दंपति को अपना फ्लैट छोड़ना पड़ा था. सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ बेटे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. बेटे का तर्क था कि उसके माता-पिता आर्थिक रूप से संपन्न हैं. हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति मायने नहीं रखती, बल्कि देखभाल का वादा पूरा होना जरूरी है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007' बुजुर्गों को सुरक्षा प्रदान करता है. विशेषज्ञों ने बुजुर्गों को जीते जी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के बजाय वसीयत (Will) बनाने की सलाह दी है.

11 जुलाई के बाद 4 महीने तक शादियों पर लगेगी रोक, जानें चातुर्मास और देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

09 जुलाई 2026

11 और 12 जुलाई को वर्ष का आखिरी विवाह मुहूर्त है, जिसके बाद देवशयनी एकादशी से चार महीने के लिए चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है. इस अवधि में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस काल में देवगुरु बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और शनि देव वक्री चाल चलेंगे, जिसके कारण नया व्यवसाय शुरू करने या बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान पत्तेदार सब्जियां, दही और बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि पूजा-पाठ, दान और भगवान शिव, दुर्गा व गणेश की आराधना का विशेष महत्व है. आगामी नवंबर माह में देवउठनी एकादशी के बाद ही सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे. तब तक केवल दान, ध्यान, मंत्र जाप और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.

शादी से पहले महिलाओं का आत्मनिर्भर होना क्यों है जरूरी, समाज की सोच और करियर पर असर

08 जुलाई 2026

आनंदीबेन पटेल की युवतियों को विवाह से पहले आत्मनिर्भर बनने की सलाह पर केंद्रित इस विशेष चर्चा में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है. शादी और करियर के बीच सही तालमेल बिठाना वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. कार्यक्रम में इस बात पर गहराई से मंथन किया गया कि महिलाओं के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र होना क्यों आवश्यक है. हालांकि, करियर बनाने की इस होड़ में शादी की उम्र बढ़ने से कई नई पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आज की महिलाएं ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उनकी स्वतंत्रता और संघर्षों का सम्मान करे. चर्चा के दौरान शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर मौजूद रूढ़िवादी धारणाओं और विवाह पूर्व काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया. यह वीडियो बदलते दौर में रिश्तों को संभालने, आत्मनिर्भरता की मांग और समाज की सोच में आवश्यक बदलाव को प्रदर्शित करता है.

अमरनाथ यात्रा: शिव-पार्वती की अमर कथा, श्वेत कबूतरों का रहस्य और बाबा बर्फानी के दर्शन का महत्व

02 जुलाई 2026

अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो चुका है. 57 दिनों तक चलने वाली यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त को समाप्त होगी, जिसमें श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम मार्गों से बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे. सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन सेवा' के तहत थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें सीआरपीएफ, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के 40 हजार से अधिक जवान तैनात हैं. इस वर्ष बालटाल मार्ग पर हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने के कारण तीर्थयात्री पैदल या खच्चरों से यात्रा कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाने से पहले पहलगाम में नंदी और चंदनबाड़ी में चंद्रमा को छोड़ा था. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय शुक्र, बृहस्पति और बुध का संयोग बना हुआ है. श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कपूर, जल साथ रखने और पंचाक्षरी मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है.

डॉक्टरों पर काम का भारी दबाव, बढ़ते वर्किंग आवर्स और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती

01 जुलाई 2026

नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर देश में डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर बढ़ते काम के दबाव को लेकर चिंताएं सामने आई हैं. एक सर्वे के अनुसार, भारत में 811 मरीजों पर केवल एक डॉक्टर है. मेडिकल एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 85 फीसदी डॉक्टर्स तनाव में हैं और 87 प्रतिशत नींद की कमी से जूझ रहे हैं. इसके अलावा, 40 प्रतिशत से अधिक मेडिकल छात्रों ने अपने वर्किंग माहौल को टॉक्सिक बताया है, जबकि रेजिडेंट डॉक्टरों को हफ्ते में 80 घंटे से अधिक काम करना पड़ता है. चर्चा के दौरान डॉ. बगाई, डॉ. मनीषा, डॉ. वली और डॉ. भानुशाली ने डॉक्टरों के लंबे वर्किंग आवर्स, मरीजों की अधिक संख्या और सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला. उपभोक्ता संरक्षण कानून और मरीजों के परिजनों द्वारा की जाने वाली हिंसा के डर से डॉक्टर अब 'डिफेंसिव मेडिसिन' का सहारा ले रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट, काउंसलिंग और वर्क-लाइफ बैलेंस आवश्यक है.

बॉलीवुड में पौराणिक फिल्मों का दौर, 'कर्ण' बनेंगे सलमान खान और रणबीर कपूर बनेंगे 'श्री राम'

26 जून 2026

भारतीय सिनेमा में इन दिनों पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. फिल्म निर्माता अब भारी-भरकम बजट और आधुनिक वीएफएक्स (VFX) तकनीक के साथ इन कहानियों को बड़े पर्दे पर ला रहे हैं. चर्चा है कि नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' में रणबीर कपूर श्री राम और राकेश ओमप्रकाश मेहरा के प्रोजेक्ट में सलमान खान 'सूर्यपुत्र कर्ण' की भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा, महेश बाबू भी एसएस राजामौली की फिल्म में नजर आ सकते हैं. फिल्म विशेषज्ञों के अनुसार, 'राजा हरिश्चंद्र' और 'जय संतोषी मां' के दौर से ही दर्शकों का इन फिल्मों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है. हालांकि, धार्मिक और ऐतिहासिक किरदारों को पर्दे पर उतारना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें तथ्यों की सटीकता और कलाकारों के लिए अपनी स्थापित छवि से बाहर निकलना आवश्यक होता है. इस चर्चा में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, किरदारों की गहराई और ऐतिहासिक फिल्मों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समीक्षकों ने अपनी राय साझा की है.