सावन मास की शुरुआत के साथ देशभर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, देवघर के बैद्यनाथ धाम और हरिद्वार में हर-हर महादेव के जयकारों के साथ जल चढ़ाने की प्रक्रिया जारी है. इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे और 28 अगस्त तक यह पावन अवधि रहेगी. काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छह प्रवेश द्वार, ओआरएस काउंटर, सीसीटीवी निगरानी और वीआईपी दर्शन पर रोक के नियम लागू किए गए हैं. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. शास्त्रानुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का निश्चित क्रम निर्धारित है, जिसमें गणेश जी, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और नाग देवता के बाद अंत में शिव जी पर जल चढ़ाया जाता है. तांबे के पात्र में दूध अर्पण वर्जित होने के कारण पीतल के पात्र का उपयोग किया जाता है. साथ ही विभिन्न राशियों के लिए बेलपत्र, पंचामृत व जलाभिषेक के विशेष विधान भी शामिल हैं.
ओडिशा के पुरी में 12 दिनों तक चले प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक समापन नीलाद्री विजय रस्म के साथ हो गया है. आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन महाप्रभु गुंडिचा मंदिर से अपने मुख्य धाम श्रीमंदिर में पुनः वापस लौट आए हैं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यात्रा के दौरान साथ न ले जाने के कारण रुष्ट हुईं माता लक्ष्मी का मान-भंजन करने के लिए गर्भगृह में प्रवेश से पूर्व महाप्रभु जगन्नाथ उन्हें पारंपरिक रसगुल्ला भेंट करते हैं. इस दौरान विशेष पहंडी बीजे अनुष्ठान का आयोजन किया गया. विद्वानों और आचार्यों के अनुसार यह लीला पारिवारिक जीवन में मधुरता, प्रेम और विनम्रता से मनमुटाव सुलझाने का संदेश देती है. वापसी यात्रा के समय पुरी में बारिश भी हुई, जिसे श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद माना. इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बहुड़ा यात्रा यानी महाप्रभु की वापसी यात्रा का शुभारंभ हो चुका है. आठ दिनों तक मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने धाम श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. इस पवित्र यात्रा के साक्षी बनने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं. सुरक्षा व्यवस्था के तहत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. बहुड़ा यात्रा के दौरान अगले चार दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. इनमें रथों पर विराजमान होना, सुना वेशा यानी स्वर्ण अवतार दर्शन, अधर पाना और अंत में नीलाद्री विजय शामिल है. नीलाद्री विजय के दिन महाप्रभु जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाने के लिए रसगुल्ले का प्रसाद लेकर श्रीमंदिर में गृह प्रवेश करेंगे. इसके अलावा अलवर, गुवाहाटी और हुगली जैसे शहरों में भी जगन्नाथ उत्सव की परंपराएं मनाई जा रही हैं.
सिडनी यूनिवर्सिटी और मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर तेजी से घट रहा है. 82 देशों के डेटा पर आधारित इस शोध में भारत की स्थिति सर्वाधिक चिंताजनक है. रिपोर्ट 2035 तक इस संकट के गहराने की चेतावनी देती है. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मुख्य कारणों में दवाओं का अनावश्यक उपयोग, अधूरा कोर्स, बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री और ऑनलाइन फार्मेसियों द्वारा डमी पर्ची का इस्तेमाल शामिल है. पोल्ट्री फार्म और कृषि के जरिए यह रसायन खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहा है, जबकि पीएम 2.5 प्रदूषण हवा से रेजिस्टेंट बैक्टीरिया फैला रहा है. आईसीएमआर की रिपोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसके अंधाधुंध इस्तेमाल पर चिंता जताई है. दिल्ली जैसे शहरों में 'सुपरबग' का खतरा बढ़ गया है, जिन पर दवाएं बेअसर हैं. विशेषज्ञों ने इसे मेडिकल साइंस का परमाणु बम बताते हुए स्पष्ट किया है कि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करना चाहिए. इस संकट से बचने के लिए सख्त नियमों और 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण की आवश्यकता है.
दिल्ली की एक कामकाजी महिला द्वारा 48 लाख रुपये सालाना कमाने वाले युवक का विवाह प्रस्ताव ठुकराने से शादी, करियर और लैंगिक अपेक्षाओं पर बहस शुरू हुई. महिला ने यह प्रस्ताव इसलिए ठुकराया क्योंकि युवक के परिवार ने शादी के बाद नौकरी छोड़ने की शर्त रखी थी. कार्यक्रम में विवाह सलाहकार, वकील और सामाजिक कार्यकर्ताओं के पैनल ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और पहचान पर चर्चा की. चर्चा में संयुक्त और एकल परिवारों में बच्चों की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियों के बंटवारे और विवाह-पूर्व काउंसलिंग की आवश्यकता पर बात हुई. पैनल ने स्पष्ट किया कि नौकरी जारी रखने या छोड़ने का निर्णय परिवार के दबाव के बजाय पति-पत्नी की आपसी सहमति से होना चाहिए. कार्यक्रम के दूसरे भाग में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी की जापान ओपन सुपर 750 जीत की रिपोर्ट दिखाई गई. इसमें जापानी प्रतिद्वंद्वी पर फाइनल जीत, दो साल से अधिक के खिताबी इंतजार की समाप्ति, फिटनेस, नेट गेम, लंबी रैलियों, डेटा विश्लेषण और एक भारतीय क्रिकेटर से मिली सलाह का उल्लेख किया गया.
सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में लागू किए गए थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला (Three-Language Formula) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस नियम को कक्षा 9 के बजाय कक्षा 6 से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव न पड़े. साथ ही, स्पष्ट किया गया कि तीसरी भाषा के रूप में हिंदी की जगह संस्कृत भी चुनी जा सकती है. नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इस नियम पर अभिभावकों और शिक्षाविदों में बहस छिड़ गई है. कुछ अभिभावक बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) या जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सिखाने के पक्ष में हैं, जो वैश्विक करियर के अवसर प्रदान करती हैं. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है जो तार्किक क्षमता बढ़ाती है. इस बीच, स्कूलों ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का केवल आंतरिक मूल्यांकन होगा.
ओडिशा के पुरी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू हो चुकी है. इस पावन अवसर पर 'गुड न्यूज टुडे' 200 घंटे की महाकवरेज लेकर आया है. भारी बारिश के बीच पुरी में लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए उमड़े हैं. यात्रा से पूर्व गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से रथों का रास्ता साफ करने की पारंपरिक 'छेरा पहरा' रस्म निभाई. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा क्रमशः 'नंदीघोष', 'तालध्वज' और 'दर्पदलन' रथों पर सवार होकर गुंडीचा मंदिर प्रस्थान करते हैं, जहां वे 10 दिन विश्राम करते हैं. इन रथों के निर्माण में किसी धातु या कील का उपयोग नहीं होता है. पुरी के अलावा नोएडा, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद में भी रथ यात्रा निकाली जा रही है. संतों और विशेषज्ञों ने इस पावन यात्रा से जुड़ी प्राचीन परंपराओं और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.