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ये हुई ना बात

9वीं में तीसरी भाषा क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की नीति पर उठाए सवाल

17 जुलाई 2026

सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में लागू किए गए थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला (Three-Language Formula) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस नियम को कक्षा 9 के बजाय कक्षा 6 से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव न पड़े. साथ ही, स्पष्ट किया गया कि तीसरी भाषा के रूप में हिंदी की जगह संस्कृत भी चुनी जा सकती है. नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इस नियम पर अभिभावकों और शिक्षाविदों में बहस छिड़ गई है. कुछ अभिभावक बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) या जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सिखाने के पक्ष में हैं, जो वैश्विक करियर के अवसर प्रदान करती हैं. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है जो तार्किक क्षमता बढ़ाती है. इस बीच, स्कूलों ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का केवल आंतरिक मूल्यांकन होगा.

पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा शुरू, गजपति महाराज ने की छेरा पहरा रस्म, देखें 200 घंटे की महाकवरेज

16 जुलाई 2026

ओडिशा के पुरी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू हो चुकी है. इस पावन अवसर पर 'गुड न्यूज टुडे' 200 घंटे की महाकवरेज लेकर आया है. भारी बारिश के बीच पुरी में लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए उमड़े हैं. यात्रा से पूर्व गजपति महाराज ने सोने की झाड़ू से रथों का रास्ता साफ करने की पारंपरिक 'छेरा पहरा' रस्म निभाई. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा क्रमशः 'नंदीघोष', 'तालध्वज' और 'दर्पदलन' रथों पर सवार होकर गुंडीचा मंदिर प्रस्थान करते हैं, जहां वे 10 दिन विश्राम करते हैं. इन रथों के निर्माण में किसी धातु या कील का उपयोग नहीं होता है. पुरी के अलावा नोएडा, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद में भी रथ यात्रा निकाली जा रही है. संतों और विशेषज्ञों ने इस पावन यात्रा से जुड़ी प्राचीन परंपराओं और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.

जगन्नाथ रथ यात्रा के रहस्य, गुंडिचा मंदिर का महत्व और छप्पन भोग की महिमा

15 जुलाई 2026

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इस ऐतिहासिक महायात्रा में भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर जाते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा को लेकर प्रशासन ने ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यात्रा भगवान के कर्मवेदी से जन्मवेदी की ओर जाने का प्रतीक है, जहां वे सात दिनों तक विश्राम करेंगे. इस दौरान मंगला आरती, खिचड़ी भोग सहित कई पारंपरिक अनुष्ठान निभाए जाएंगे. यात्रा के दौरान हेरा पंचमी जैसी महत्वपूर्ण परंपराएं भी पूरी की जाएंगी, जिसमें माता लक्ष्मी के क्रोधित होने और रथ का हिस्सा तोड़ने का विधान है. इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है, जो भगवान के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं.

सेवा नहीं तो संपत्ति भी नहीं, बुजुर्ग माता-पिता को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

10 जुलाई 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संबंध में एक फैसला सुनाया है. अदालत के अनुसार, यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने का वादा पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर की गई संपत्ति को वापस लिया जा सकता है. मुंबई के लोअर परेल के एक कारोबारी बेटे द्वारा देखभाल न करने पर बुजुर्ग दंपति को अपना फ्लैट छोड़ना पड़ा था. सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ बेटे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. बेटे का तर्क था कि उसके माता-पिता आर्थिक रूप से संपन्न हैं. हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता की आर्थिक स्थिति मायने नहीं रखती, बल्कि देखभाल का वादा पूरा होना जरूरी है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007' बुजुर्गों को सुरक्षा प्रदान करता है. विशेषज्ञों ने बुजुर्गों को जीते जी प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के बजाय वसीयत (Will) बनाने की सलाह दी है.

11 जुलाई के बाद 4 महीने तक शादियों पर लगेगी रोक, जानें चातुर्मास और देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

09 जुलाई 2026

11 और 12 जुलाई को वर्ष का आखिरी विवाह मुहूर्त है, जिसके बाद देवशयनी एकादशी से चार महीने के लिए चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है. इस अवधि में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस काल में देवगुरु बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और शनि देव वक्री चाल चलेंगे, जिसके कारण नया व्यवसाय शुरू करने या बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान पत्तेदार सब्जियां, दही और बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि पूजा-पाठ, दान और भगवान शिव, दुर्गा व गणेश की आराधना का विशेष महत्व है. आगामी नवंबर माह में देवउठनी एकादशी के बाद ही सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे. तब तक केवल दान, ध्यान, मंत्र जाप और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.

शादी से पहले महिलाओं का आत्मनिर्भर होना क्यों है जरूरी, समाज की सोच और करियर पर असर

08 जुलाई 2026

आनंदीबेन पटेल की युवतियों को विवाह से पहले आत्मनिर्भर बनने की सलाह पर केंद्रित इस विशेष चर्चा में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है. शादी और करियर के बीच सही तालमेल बिठाना वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. कार्यक्रम में इस बात पर गहराई से मंथन किया गया कि महिलाओं के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र होना क्यों आवश्यक है. हालांकि, करियर बनाने की इस होड़ में शादी की उम्र बढ़ने से कई नई पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आज की महिलाएं ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उनकी स्वतंत्रता और संघर्षों का सम्मान करे. चर्चा के दौरान शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर मौजूद रूढ़िवादी धारणाओं और विवाह पूर्व काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया. यह वीडियो बदलते दौर में रिश्तों को संभालने, आत्मनिर्भरता की मांग और समाज की सोच में आवश्यक बदलाव को प्रदर्शित करता है.