दिल्ली के एम्स (AIIMS) की रिसर्च के अनुसार बच्चों में मोबाइल फोन की लत और ऑटिज्म (Autism) के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों ने 'मोबाइल हटाओ, बच्चों को बचाओ' कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि जन्म से 18 महीने तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम शून्य होना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल से उनकी सुनने, समझने और बोलने की क्षमता प्रभावित होती है. ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसके लिए जेनेटिक कारणों के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण, माइक्रो-प्लास्टिक और मिलावटी खानपान को भी जिम्मेदार माना गया है. डॉक्टरों के अनुसार, यदि बच्चा 16 महीने तक कोई सार्थक शब्द नहीं बोलता या आई-कांटेक्ट नहीं करता, तो यह इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. समाज में व्याप्त भ्रांतियों और प्रशिक्षित थेरेपिस्ट की कमी के कारण इसके उपचार में बाधाएं आ रही हैं. विशेषज्ञों ने जिला अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और परिवार के सक्रिय सहयोग पर जोर दिया है ताकि बच्चों के मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके.