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Amarnath Yatra: शिव-पार्वती की अमर कथा, श्वेत कबूतरों का रहस्य और बाबा बर्फानी के दर्शन का महत्व

अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो चुका है. 57 दिनों तक चलने वाली यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त को समाप्त होगी, जिसमें श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम मार्गों से बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे. सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन सेवा' के तहत थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें सीआरपीएफ, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के 40 हजार से अधिक जवान तैनात हैं. इस वर्ष बालटाल मार्ग पर हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने के कारण तीर्थयात्री पैदल या खच्चरों से यात्रा कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाने से पहले पहलगाम में नंदी और चंदनबाड़ी में चंद्रमा को छोड़ा था. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय शुक्र, बृहस्पति और बुध का संयोग बना हुआ है. श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कपूर, जल साथ रखने और पंचाक्षरी मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है.