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Bombay High Court का अहम फैसला: पत्नी का खाना न बनाना क्रूरता नहीं, शादी बराबरी का रिश्ता है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक तलाक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शादी बराबरी का रिश्ता है, कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं. अदालत ने 2002 में हुई शादी के 24 साल पुराने विवाद पर सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा मंजूर किए गए तलाक को रद्द कर दिया है. कोर्ट के अनुसार, पत्नी द्वारा खाना न बनाना या घर के काम न करना मानसिक क्रूरता का आधार नहीं हो सकता. 2004 में तलाक मिलने और 2010 में गुजारा भत्ता खारिज होने के बाद पत्नी ने हाईकोर्ट का रुख किया था. अब मई 2026 में कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए गुजारे भत्ते को मंजूरी दी और दंपती को दोबारा साथ रहने का आदेश दिया है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक अलग रहने के बाद साथ रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कानूनी तौर पर वे अब भी पति-पत्नी हैं. इस मामले ने शादी के शुरुआती वर्षों में फैमिली काउंसलिंग की आवश्यकता और 'इरिट्रीवेबल ब्रेकडाउन ऑफ मैरिज' जैसे कानूनी पहलुओं पर नई बहस छेड़ दी है.