चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है, जिसमें 72 वर्षों के बाद अमावस्या और प्रतिपदा तिथि एक ही दिन पड़ने का दुर्लभ संयोग बन रहा है. यह पर्व 27 मार्च को रामनवमी के साथ संपन्न होगा. इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होगा. कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक निर्धारित है. इस नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, रवि और द्विपुस्कर जैसे कई शुभ योग बन रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, विभिन्न देवी स्वरूपों की पूजा से ग्रह दोषों का निवारण संभव है. मां कुष्मांडा सूर्य, स्कंदमाता बुध, कात्यायनी गुरु, कालरात्रि शनि, महागौरी राहु और सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं. पूजा विधान के अंतर्गत कलश में रोली, चावल, हल्दी और गंगाजल का प्रयोग अनिवार्य है. मां के विभिन्न स्वरूपों को मालपुए, केले, शहद, गुड़ और नारियल का भोग अर्पित किया जाता है. यह समय आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्म शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.