गुड न्यूज़ टुडे के विशेष कार्यक्रम 'फरवरी में ही क्यों गर्मी का मार्च' में जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी पर विस्तृत चर्चा की गई. वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहसिन वली ने बताया कि दिन में गर्मी और रात की ठंड के कारण निमोनिया और बुखार के मामले बढ़ रहे हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिमपूर्ण है. मौसम विज्ञानी डॉ. गुफरान बेग ने चेतावनी दी कि भारत अब एल नीनो (El Niño) के प्रभाव में है, जिससे इस साल भीषण गर्मी और मानसून में बाधा आने की 96% संभावना है. विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है और मई में पारा सामान्य से 2 डिग्री अधिक रहने का अनुमान है. पर्यावरणविद् सुभाष शर्मा ने वनों की कटाई और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को इस स्थिति का मुख्य कारण बताया. चर्चा में प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान, चक्रवातों की तीव्रता और बढ़ती आबादी के प्रभावों पर भी प्रकाश डाला गया. समाधान के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है.