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Holashtak 2026: 100 साल बाद ग्रहण का साया, जानें शुभ कार्यों की मनाही और कष्ट निवारण के अचूक उपाय

गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम में प्रमुख ज्योतिषियों ने होलाष्टक के महत्व पर चर्चा की. विशेषज्ञों ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक चलने वाले इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, क्योंकि यह अवधि भक्त प्रहलाद को दी गई यातनाओं का प्रतीक है. इस वर्ष होलाष्टक ज्योतिषीय दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग 100 वर्षों बाद इस पर ग्रहण का साया है और पंचग्रही योग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार, यह समय जप, तप और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम है. नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और ग्रहों की शांति के लिए विष्णु सहस्रनाम, हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है. इसके अतिरिक्त, होलिका दहन के समय काले तिल का प्रयोग और कुंडली के ग्रहों के अनुसार विशेष उपाय करना भी लाभकारी बताया गया है.