प्रयागराज में जारी माघ मेले में संगम तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है, जहाँ पहले तीन दिनों में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुँचे और पहले ही दिन 31 लाख लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई. इस वर्ष मेले का एक विशेष आकर्षण 550 वर्षों के बाद पंचकोसी परिक्रमा की परंपरा का पुनः आरंभ होना है. जूना अखाड़े के महंत नवल किशोर दास के अनुसार, संगम की रेती पर कल्पवास करने से साधक को आत्मशुद्धि और मोक्ष मिलता है. ज्योतिषाचार्य राज मिश्रा ने बताया कि इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से स्नान का महत्व और बढ़ गया है. आध्यात्मिक गुरु संजीव कृष्ण ठाकुर ने गंगा में स्नान के नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नदी में वस्त्र धोना या कुल्ला करना वर्जित है. मेले में केदारनाथ से आए एक नागा साधु अपनी अनूठी वेशभूषा के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.