आईसीएमआर के पूर्व निदेशक डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुए शोध के अनुसार पांच राज्यों के 75 स्कूलों के 2331 छात्रों और 373 शिक्षकों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 88.4 प्रतिशत शिक्षक और 77.7 प्रतिशत छात्र स्वास्थ्य सूचनाओं के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं. इनमें 33.2 प्रतिशत शिक्षक जानकारी की प्रामाणिकता को लेकर अनिर्णय की स्थिति में होने के बावजूद लगभग 55 प्रतिशत सामग्री आगे साझा करते हैं. विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया, रील्स और एआई टूल्स के आधार पर स्व-उपचार तथा बिना चिकित्सकीय परामर्श एंटीबायोटिक्स के उपयोग पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के किडनी और लिवर पैरामीटर भिन्न होते हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा इसे 'इन्फोडेमिक' की श्रेणी में रखा गया है. परिचर्चा में विशेषज्ञों ने स्कूलों में सोशल मीडिया साक्षरता पाठ्यक्रम लागू करने, केवल आईसीएमआर या स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे सत्यापित स्रोतों से परामर्श लेने और मेडिकल इन्फ्लुएंसर्स के नियमन की सिफारिश की.