11 और 12 जुलाई को वर्ष का आखिरी विवाह मुहूर्त है, जिसके बाद देवशयनी एकादशी से चार महीने के लिए चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है. इस अवधि में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस काल में देवगुरु बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और शनि देव वक्री चाल चलेंगे, जिसके कारण नया व्यवसाय शुरू करने या बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान पत्तेदार सब्जियां, दही और बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि पूजा-पाठ, दान और भगवान शिव, दुर्गा व गणेश की आराधना का विशेष महत्व है. आगामी नवंबर माह में देवउठनी एकादशी के बाद ही सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे. तब तक केवल दान, ध्यान, मंत्र जाप और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.