उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रशासन द्वारा संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपये का शुल्क निर्धारित करने पर विवाद उत्पन्न हो गया है. जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांत नंद सरस्वती ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे व्यवस्था के नाम पर अनुचित बताया है. साध्वी विश्वरूपा और स्वास्तिक पीठधीश स्वामी अवधेश पुरी महाराज के अनुसार, मंदिरों का व्यापारिक केंद्र बनना और आर्थिक आधार पर वर्गीकरण सनातन धर्म की समानता के सिद्धांतों के विरुद्ध है. मंदिर प्रबंधन का तर्क है कि डिजिटल बुकिंग और सशुल्क व्यवस्था से 1200 श्रद्धालुओं की क्षमता के अनुसार भीड़ प्रबंधन में पारदर्शिता और सुगमता आएगी. हालांकि, विशेषज्ञों और साधु-संतों ने सुझाव दिया है कि शुल्क लगाने के बजाय केवल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन सिस्टम जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जानी चाहिए. इस चर्चा में मंदिर के सरकारीकरण और आम भक्तों पर आर्थिक बोझ डालने जैसे विषयों पर भी प्रश्न उठाए गए हैं. महाकाल मंदिर प्रशासन के इस नए नियम पर श्रद्धालुओं और धार्मिक गुरुओं की प्रतिक्रियाएं निरंतर जारी हैं.