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Mahashivratri 2026: शनि-सूर्य का कुंभ में मिलन, इन उपायों से दूर होगा कालसर्प दोष और आर्थिक संकट

महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर ज्योतिष विशेषज्ञों ने इस पर्व के धार्मिक महत्व और पूजा विधि पर विस्तृत चर्चा की है. ज्योतिषाचार्य अरविंद शुक्ला के अनुसार, इस दिन चार पहर की पूजा में दूध, दही, शहद और शर्करा से अभिषेक का विधान है. इस वर्ष 300 साल बाद लक्ष्मी नारायण, बुधादित्य और चतुर्ग्रही जैसे दुर्लभ राजयोग बन रहे हैं. कुंभ राशि में सूर्य और शनि की युति के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग भी है. पूजा के लिए 15 फरवरी की रात 12:09 से 1:01 बजे तक का 'निश्चित काल' सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. विशेषज्ञों ने कालसर्प दोष निवारण हेतु चांदी के नाग-नागिन के जोड़े और मानसिक शांति के लिए चांदी का चंद्रमा अर्पित करने की सलाह दी है. रुद्राभिषेक के दौरान रुद्राष्टाध्यायी पाठ और विभिन्न कामनाओं के लिए गन्ने के रस या सरसों के तेल के प्रयोग का उल्लेख किया गया है. कार्यक्रम में दांपत्य सुख के लिए गौरी मंत्र और तांबे के पात्र से दूध न चढ़ाने जैसी सावधानियों की जानकारी भी दी गई है.