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National Doctors Day: डॉक्टरों पर काम का भारी दबाव, बढ़ते वर्किंग आवर्स और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती

नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर देश में डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर बढ़ते काम के दबाव को लेकर चिंताएं सामने आई हैं. एक सर्वे के अनुसार, भारत में 811 मरीजों पर केवल एक डॉक्टर है. मेडिकल एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 85 फीसदी डॉक्टर्स तनाव में हैं और 87 प्रतिशत नींद की कमी से जूझ रहे हैं. इसके अलावा, 40 प्रतिशत से अधिक मेडिकल छात्रों ने अपने वर्किंग माहौल को टॉक्सिक बताया है, जबकि रेजिडेंट डॉक्टरों को हफ्ते में 80 घंटे से अधिक काम करना पड़ता है. चर्चा के दौरान डॉ. बगाई, डॉ. मनीषा, डॉ. वली और डॉ. भानुशाली ने डॉक्टरों के लंबे वर्किंग आवर्स, मरीजों की अधिक संख्या और सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला. उपभोक्ता संरक्षण कानून और मरीजों के परिजनों द्वारा की जाने वाली हिंसा के डर से डॉक्टर अब 'डिफेंसिव मेडिसिन' का सहारा ले रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट, काउंसलिंग और वर्क-लाइफ बैलेंस आवश्यक है.