Ye Hui Na Baat | नवरात्रि के पावन पर्व पर गरबा और डांडिया केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि मां शक्ति की आराधना और सामूहिक उत्सव का प्रतीक माना जाता है. गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम में गरबा के आध्यात्मिक महत्व और सदियों पुरानी परंपराओं पर चर्चा की गई. चर्चा के दौरान बताया गया कि गरबा का उद्गम ब्रज और रासलीला से जुड़ा है, जहां गोपियों ने मां कात्यायनी की आराधना की थी. गरबा में प्रयुक्त मिट्टी का छिद्रित पात्र मानव शरीर का और उसके भीतर जलता दीपक अंतरात्मा की ऊर्जा का प्रतीक है. इसके साथ ही कार्यक्रम में गरबा ट्रेनर ने गलगोटो, तीन ताली और डाकला जैसे ट्रेंडिंग स्टेप्स भी सिखाए. गुजरात के जामनगर का स्वास्तिक रास, नवसारी का 120 साल पुराना डोरी रास और महोबा में महिलाओं का तलवार रास परंपरा और नारी सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल पेश करते हैं.