scorecardresearch

Puri Jagannath Rath Yatra का समापन, माता लक्ष्मी का मान-भंजन और पारिवारिक जीवन का गूढ़ संदेश

ओडिशा के पुरी में 12 दिनों तक चले प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक समापन नीलाद्री विजय रस्म के साथ हो गया है. आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन महाप्रभु गुंडिचा मंदिर से अपने मुख्य धाम श्रीमंदिर में पुनः वापस लौट आए हैं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यात्रा के दौरान साथ न ले जाने के कारण रुष्ट हुईं माता लक्ष्मी का मान-भंजन करने के लिए गर्भगृह में प्रवेश से पूर्व महाप्रभु जगन्नाथ उन्हें पारंपरिक रसगुल्ला भेंट करते हैं. इस दौरान विशेष पहंडी बीजे अनुष्ठान का आयोजन किया गया. विद्वानों और आचार्यों के अनुसार यह लीला पारिवारिक जीवन में मधुरता, प्रेम और विनम्रता से मनमुटाव सुलझाने का संदेश देती है. वापसी यात्रा के समय पुरी में बारिश भी हुई, जिसे श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद माना. इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.