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Puri Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथ यात्रा के रहस्य, गुंडिचा मंदिर का महत्व और छप्पन भोग की महिमा

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. इस ऐतिहासिक महायात्रा में भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर जाते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा को लेकर प्रशासन ने ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यात्रा भगवान के कर्मवेदी से जन्मवेदी की ओर जाने का प्रतीक है, जहां वे सात दिनों तक विश्राम करेंगे. इस दौरान मंगला आरती, खिचड़ी भोग सहित कई पारंपरिक अनुष्ठान निभाए जाएंगे. यात्रा के दौरान हेरा पंचमी जैसी महत्वपूर्ण परंपराएं भी पूरी की जाएंगी, जिसमें माता लक्ष्मी के क्रोधित होने और रथ का हिस्सा तोड़ने का विधान है. इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है, जो भगवान के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं.