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Sawan 2026: सावन में शिव पूजा के नियम, जलाभिषेक का सही क्रम और राशि अनुसार उपाय

सावन मास की शुरुआत के साथ देशभर के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, देवघर के बैद्यनाथ धाम और हरिद्वार में हर-हर महादेव के जयकारों के साथ जल चढ़ाने की प्रक्रिया जारी है. इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे और 28 अगस्त तक यह पावन अवधि रहेगी. काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छह प्रवेश द्वार, ओआरएस काउंटर, सीसीटीवी निगरानी और वीआईपी दर्शन पर रोक के नियम लागू किए गए हैं. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. शास्त्रानुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का निश्चित क्रम निर्धारित है, जिसमें गणेश जी, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और नाग देवता के बाद अंत में शिव जी पर जल चढ़ाया जाता है. तांबे के पात्र में दूध अर्पण वर्जित होने के कारण पीतल के पात्र का उपयोग किया जाता है. साथ ही विभिन्न राशियों के लिए बेलपत्र, पंचामृत व जलाभिषेक के विशेष विधान भी शामिल हैं.