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इस Navratri में अष्टमी-नवमी का महासंयोग, जानें पूजन विधि और सभी राशियों पर असर

Ye Hui Na Baat | शारदीय नवरात्र में इस बार दुर्गा अष्टमी और नवमी के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग और तुला राशि में त्रिग्रही राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अष्टमी और नवमी तिथि का पूजन 19 अक्टूबर को किया जाएगा. कार्यक्रम में ज्योतिष आचार्यों ने स्पष्ट किया कि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 15 मिनट से पहले अष्टमी का कन्या पूजन संपन्न किया जा सकता है. इसके बाद 48 मिनट का संधिकाल रहेगा जिसमें पूजा व सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं. इसके उपरांत दोपहर 11 बजकर 41 मिनट से अभिजीत मुहूर्त में नवमी पूजन और हवन का उत्तम समय रहेगा. साथ ही मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों पर सूर्य गोचर और इन विशेष योगों के प्रभाव तथा उनके निवारण के सरल उपाय बताए गए. रिपोर्ट में महाराष्ट्र के तुलजापुर स्थित 51 शक्तिपीठों में शामिल मां तुलजा भवानी मंदिर के इतिहास, छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी के रूप में उनकी महत्ता और मुरारी बापू की भारत स्वस्तिक यात्रा की भी विस्तृत जानकारी दी गई.