गुजरात स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर के 90 मीटर ऊंचे मुख्य शिखर पर पहली बार अलौकिक कुंभाभिषेक संपन्न हुआ, जिसके लिए 11 पवित्र नदियों के जल का उपयोग किया गया. महोत्सव के समापन पर भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण टीम ने हवाई करतब दिखाए और चेतक हेलीकॉप्टर्स द्वारा पुष्प वर्षा की गई. कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास, इसकी प्राचीन वास्तुकला और विदेशी आक्रमणों के बाद हुए पुनर्निर्माण पर विस्तृत चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने मंदिर के उस चुंबकीय प्रभाव का भी उल्लेख किया जिसके कारण प्राचीन ज्योतिर्लिंग हवा में स्थित रहता था. इस आयोजन में सनातन संस्कृति, आयुर्वेद और ज्योतिष के महत्व को रेखांकित करते हुए सोमनाथ को शिक्षा एवं विज्ञान के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया. यह महोत्सव भारतीय आस्था और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक के रूप में मनाया गया, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है.