सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में लागू किए गए थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला (Three-Language Formula) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस नियम को कक्षा 9 के बजाय कक्षा 6 से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव न पड़े. साथ ही, स्पष्ट किया गया कि तीसरी भाषा के रूप में हिंदी की जगह संस्कृत भी चुनी जा सकती है. नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इस नियम पर अभिभावकों और शिक्षाविदों में बहस छिड़ गई है. कुछ अभिभावक बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) या जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सिखाने के पक्ष में हैं, जो वैश्विक करियर के अवसर प्रदान करती हैं. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है जो तार्किक क्षमता बढ़ाती है. इस बीच, स्कूलों ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का केवल आंतरिक मूल्यांकन होगा.