उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगल भीषण आग की चपेट में हैं, जिससे यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन गई है. अब तक लगभग 3600 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है, जिसका सबसे ज्यादा असर चमोली, नैनीताल, शिमला और कसौली जैसे इलाकों में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस वनाग्नि का मुख्य कारण मानवीय लापरवाही है, जिसमें पर्यटकों द्वारा जलती सिगरेट फेंकना और स्थानीय लोगों द्वारा खेतों के लिए लगाई आग का अनियंत्रित होना शामिल है. इसके अतिरिक्त, चीड़ के जंगलों का विस्तार और जमीन पर बिछी ज्वलनशील पिरूल (सूखी पत्तियां) इस आग को तेजी से फैला रही है. वायुसेना और वन विभाग आग बुझाने के प्रयासों में जुटे हैं, जबकि आग पर जल्दी काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टर से मिट्टी-युक्त पानी के छिड़काव जैसे सुझाव भी सामने आए हैं. इस आपदा के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं.