मोबाइल और सोशल मीडिया से हर कोई वाकिफ है. लेकिन यही दो चीज़ें अब बचपन भी छीन रही हैं. बड़े तो बड़े, छोटे भी सोशल मीडिया से जुड़े रहना चाहते हैं. उनके लिए रील चलाना आसान होता है और किताबों के पन्ने पलटना मुश्किल...हाल ये है कि यही मोबाइल की अति अब उनका बचपन भी प्रभावित भी हो रहा है लेकिन मोबाइल से दूरी बच्चों के लिए कितनी जरुरी ? संसद में क्यों उठा बच्चों के स्क्रीन टाइम का मुद्दा ? 'बचपन' को वेब'जाल' से बचाने का क्या है फॉर्मूला ? क्या अब भारत में भी सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा तय करने का समय आ गया है. इसी पर होगी बात. आज हमारे साथ मनोचिकित्सक और साइबर साइक्लॉजिस्ट भी रहेंगे मौजूद.