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Happy Birthday Abhilasha Mhatre: क्यों क्वीन ऑफ कबड्डी कही जाती हैं वर्ल्ड कप विजेता टीम की सदस्य रहीं अभिलाषा म्हात्रे

भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कप्तान रही अभिलाषा म्हात्रे आज अपना 35वां जन्मदिन मना रही हैं. अभिलाषा म्हात्रे के बेहतरीन खेल के कारण उन्हे क्वीन ऑफ कबड्डी भी कहा जाता है. अभिलाषा को भारत में बेहतरीन कबड्डी खिलाड़ियों में से एक हैं.

Abhilasha Mhatre Abhilasha Mhatre
हाइलाइट्स
  • उन्हें 2007 और 2008 में लगातार चोटें आईं थी

  • 2015 में भारत सरकार से अर्जुन पुरस्कार मिला

भारतीय महिला कबड्डी टीम की पूर्व कप्तान अभिलाषा म्हात्रे का आज 35वां जन्मदिन है. अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित अभिलाषा को भारत में बेहतरीन कबड्डी खिलाड़ियों में से एक माना जाता है. उनके खेल को देखते हुए उन्हें क्वीन ऑफ कबड्डी के कहा जाता है. म्हात्रे 2012 कबड्डी विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य भी थी. वहीं 2014 में इंचियोन में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई थी. 

सातवीं कक्षा से शुरू किया खेलना
कबड्डी खिलाड़ी अभिलाषा मुंबई के स्वामी मुक्तानंद हाई स्कूल से पढ़ाई की है. उनका कबड्डी के अभ्यास का मैदान उनका स्कूल मैदान था. वो जिस क्लब के लिए खेला करती थी उसके कई सीनियर खिलाड़ी भी प्रैक्टिस किया करते थे. जिसके चलते उन्होंने कम उम्र में ही कई बड़े टूर्नामेंट देख लिया था. उनकी कड़ी मेहनत के चलते  उन्हें 2006 में श्रीलंका में दक्षिण एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह मिली. इस टूर्नामेंट से अभिलाषा ने अपनी अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया. अभिलाषा ने 2012 के महिला कबड्डी विश्व कप में भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका दिलाई. इसके बाद अभिलाषा ने देश को 014 में इंचियोन में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीताने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्होंने 2016 में टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए देश को एक और स्वर्ण पदक जीता. 2017 में आयोजित हुए एशियाई कबड्डी चैम्पियनशिप में अभिलाषा को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई. इस टूर्नामेंट में भी अभिलाषा ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए भारत की झोली में एक और गोल्ड डाल दिया. 

चोट भी नहीं रोक सका कबड्डी खेलने से
अभिलाषा को कई चोटें आई है. उन्हें 2007 और 2008 में लगातार चोटें आईं थी. जिसके चलते उन्हें अपने दोनों घुटनों का ऑपरेशन करवाना पड़ा था. जिसके चलते उन्हें कुछ समय तक कबड्डी से दूर रहना पड़ा था. इस दौरान उन्हें ऐसी चोट लगी थी कि उनका अब कबड्डी करियर खत्म हो जाएगा. लेकिन उनके पिता और क्लब के कोच ने अभिलाषा को प्रेरित किया. जिसके बाद उन्होंने कबड्डी में फिर से वापसी की. कबड्डी में वापसी के बाद कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम खेले. अभिलाषा ने  57 वीं सीनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप गोल्ड और 58वीं सीनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप उडिपी में टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में सम्मानित किया गया था. 

अभिलाषा म्हात्रे की उपलब्धियां
कबड्डी खिलाड़ी अभिलाषा म्हात्रे को करियर में कई पुरस्कार मिले. उन्हें 2015 में भारत सरकार से अर्जुन पुरस्कार मिला. श्रीलंका में 2006 में हुए दक्षिण एशियाई खेल में गोल्ड जीता था. वहीं वह 2012 महिला कबड्डी विश्व कप भारतीय टीम का हिस्सा भी रही थी. अभिलाषा को चौथा एशियाई इंडोर और मार्शल आर्ट गेम्स 2013, - 17वें एशियाई खेल, 12वें दक्षिण एशियाई खेल, एशियाई कबड्डी चैम्पियनशिप 2017 में गोल्ड जीता था. 53वीं सीनियर राष्ट्रीय कबड्डी चैंपियनशिप और 24वां सीनियर नेशनल फेडरेशन कप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.