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Asian Games Hockey Gold Nikki Pradhan: पिता ने बांस के डंडे से बनाकर दी थी हॉकी स्टिक, मां डांटती थी खेलने से... आज उसी बेटी ने गोल्ड जीकर देश को किया गौरवान्वित, पढ़ें उनकी कहानी

एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. टीम की स्टार डिफेंडर निक्की प्रधान के झारखंड स्थित खूंटी गांव में जश्न का माहौल है. बचपन में पिता के बनाए 'बांस के डंडे' से हॉकी खेलने वाली निक्की ने कड़े संघर्ष के दम पर देश को गौरवान्वित किया है.

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झारखंड की बेटी ने हॉकी टीम में रचा इतिहास झारखंड की बेटी ने हॉकी टीम में रचा इतिहास

एशियन गेम्स में हॉकी टूर्नामेंट में भारत ने गोल्ड मेडल जीतकर देशवासियों को गौरवान्वित किया है. भारतीय टीम की इस जीत का जश्न झारखंड के खूंटी में भी देखने को मिला, जहां टीम का हिस्सा रहीं निक्की प्रधान के घर खुशी का माहौल है. टीम में डिफेंडर की भूमिका निभाने वाली निक्की की इस उपलब्धि पर उनके पिता सोमा प्रधान, मां जीतन देवी और बहन सरीना प्रधान ने पूरी टीम को बधाई दी और निक्की की सफलता पर गर्व जताया.

अभाव में पली-बढ़ी निक्की ने हासिल किया बड़ा मुकाम
निक्की प्रधान का बचपन अभावों के बीच बीता, लेकिन हॉकी के प्रति उनका लगाव लगातार बना रहा. बेटी को देश के लिए खेलते और इस मुकाम तक पहुंचते देखकर पिता सोमा प्रधान खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. सोमा प्रधान ने भारत की जीत पर देशवासियों को बधाई दी और बेटी की सफलता पर खुशी जताई. उन्होंने बताया कि बचपन में निक्की के लिए उन्होंने बांस के डंडे से हॉकी स्टिक बनाकर दी थी. जिस डंडे से खेलने वाली उनकी बेटी आज भारतीय टीम का हिस्सा बनकर इस मुकाम तक पहुंची है, इसे देखकर उन्हें बहुत फक्र महसूस हो रहा है. उन्होंने आगे उम्मीद जताई कि भारतीय टीम ओलंपिक में भी इसी तरह अपना प्रदर्शन जारी रखे.

बचपन में खेलने के लिए मां से पड़ती थी डांट
निक्की की मां जीतन देवी ने अपनी गांव की भाषा नागपुरी में बताया कि उनकी बेटी को बचपन से ही खेलने का बहुत मन था. वह कई बार मना करने के बावजूद घर से निकलकर खेलने चली जाती थी. जीतन देवी ने बताया कि वह निक्की को घर का काम देखने के लिए डांटती थीं और खेलने जाने से रोकती थीं, लेकिन निक्की नहीं मानती थी और चुपके से खेलने चली जाती थी.

कोच दशरथ ने दिखाई आगे बढ़ने की राह
निक्की के खेल को देखते हुए उनके कोच रहे दशरथ ने उनके परिवार से मुलाकात की. उन्होंने निक्की को हॉकी खेलने का मौका दिलाने के लिए हॉकी डे बोर्डिंग में उसका नामांकन कराया और वहां से उसके खेल को लगातार निखरने का अवसर मिला. इसके बाद निक्की ने कई टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे अपने खेल में आगे बढ़ती गईं. आज भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, उस पर उनकी मां भी अपनी बेटी पर गर्व महसूस कर रही हैं.

बहन बोली- मैच के दौरान कभी इधर तो कभी उधर पलड़ा भारी लगा
निक्की की बहन सरीना प्रधान ने बताया कि जब दीदी का मैच चल रहा था, तब परिवार काफी चिंतित था. उन्हें कभी इधर तो कभी उधर का पलड़ा भारी लगता था. लेकिन जैसे ही भारतीय टीम ने जीत हासिल की, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. सरीना ने पूरी भारतीय टीम को जीत की बधाई दी और कहा कि टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय टीम आगे ओलंपिक में भी इसी तरह अपना प्रदर्शन जारी रखे. अपने देश के लिए दीदी को खेलते हुए देखना सरीना के लिए गर्व की बात है. निक्की की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ झारखंड के खूंटी में भी खुशी का माहौल है.
 

(रिपोर्ट- अरविंद सिंह)

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