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'बल्लेबाज गेंद भी लाता था, जूस भी पिलाता था'... क्रिकेटर आकाशदीप सिंह ने सुनाया बल्लेबाज से गेंदबाज बनने वाला किस्सा

'पंचायत आजतक बिहार' में क्रिकेटर आकाशदीप सिंह ने बताया कि मैं पहले गांव में बैटिंग करता था, लेकिन जब बाहर गया तो पता चालाक कि बैटिंग करने किट की जरूरत होती है तो मैंने बॉलिंग चुन लिया.

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Akashdeep Singh Akashdeep Singh

'पंचायत आजतक बिहार' कार्यक्रम में बिहार के मशहूर क्रिकेटर आकाशदीप सिंह ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने गांव की जिंदगी से लेकर क्रिकेटर बनने के लिए किए गए संघर्ष के किस्से सुनाए. आकाशदीप ने बताया कि वो पहले बल्लेबाजी करते थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ इसलिए गेंदबाज बनने का फैसला किया, क्योंकि उनके पास बैटिंग किट नहीं थी. इसके अलावा भी उन्होंने कई चीजें शेयर की.

क्यों एक बल्लेबाज बन गया गेंदबाज?
आकाशदीप सिंह ने बताया कि मैं गांव में बैट्समैन था. लेकिन जब बाहर गया तो पता चला कि बैटिंग करने के लिए किट की जरूरत होगी, जो काफी महंगे होते हैं तो मैंने सोचा कि क्या कर सकते हैं तो मैंने बॉलिंग चूज कर लिया. आकाशदीप ने बताया कि बॉलिंग में एडवांटेज ये था कि बल्लेबाज अपना बॉल लेकर आता था और आपको देता था, आप उसको बॉल डालो. बाद में वो जूस भी पिलाता था. इसलिए मैंने बॉलिंग करना शुरू किया.

गांव से कोलकाता तक के सफर का किस्सा-
आकाशदीप सिंह ने कहा कि मैं गांव में सॉफ्ट बॉल से क्रिकेट खेलता था. लेकिन जब बाहर गया तो देखा कि बॉल हैवी है. उसके लिए शूज अलग होते हैं, ये मुझे नहीं मालूम था. वहां मेरे कोच ने मुझे बोला कि शूज चेंज कर ले, इससे इंजरी हो जाएगी. इसके बाद धीरे-धीरे मैंने ये सीखा. सिंह ने बताया कि उसके बाद मैं कोलकाता गया. 

क्या क्रिकेट खेलने के लिए पैसे थे?
जब आकाशदीप सिंह से पूछा गया कि क्या आपके पास पैसे होते थे? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि गांव में आवश्यकताएं बहुत कम हैं तो गांव में रहने के लिए पैसे थे. अगर ऐसे सोचिए तो नहीं थे. सिंह ने बताया कि अगर प्रोफेशनल क्रिकेट के लिहाज से देखे तो पैसे नहीं थे.

फोन नहीं देखता था- आकाशदीप सिंह
उन्होंने बताया कि जब मैं कोलकाता गया तो मेरे को ये था कि मैं यहां सिर्फ खेलने आया हूं. उन्होंने बताया कि उन दिनों मैं फोन देखता हूं. मैं 9 बजे तक सो जाता था और सुबह जगता था. ब्रेकफास्ट तैयार करता था, बस पकड़ता था और वहां जाकर प्रैक्टिस करता था.

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