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Sooryavanshi vs Sanju: 173 रन के मुकाबले 246 रन, 8 मैचों के छोटे करियर में सैमसन पर भारी सूर्यवंशी, कब मिलेगी टीम में पक्की जगह?

वैभव सूर्यवंशी को एक बार फिर प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली. उधर, संजू सैमसन एक बार फिर फ्लॉप साबित हुए. इसके बाद सोशल मीडिया पर फैंस सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्लेइंग इलेवन में सूर्यवंशी की जगह कब पक्की होगी? चलिए अब तक के दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में बताते हैं.

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Sooryavanshi vs Sanju Sooryavanshi vs Sanju

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में एक बार फिर संजू सैमसन फ्लॉप साबित हुए. सैमसन सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए. इसको लेकर सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा. फैंस वैभव सूर्यवंशी को प्वाइंग इलेवन में पक्की जगह चाहते हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि संजू सैमसन का प्रदर्शन हर मैच में खराब रहा है. लेकिन अगर सूर्यवंशी के 8 मैचों के छोटे से इंटरनेशनल करियर पर नजर डालें तो उनका प्रदर्शन संजू के मुकाबले काफी बेहतर रहा है.

संजू सैमसन के पिछले 8 मुकाबले-
संजू सैमसन पिछली 4 पारियों में सिर्फ 29 रन बनाए हैं. इसमें 11, 2, 7 और 9 रन शामिल हैं. हालांकि उससे पहले उनहोंने 50 और 57 रन की पारी खेली थी. अगर पिछली 8 मैचों की बात करें तो संजू सैमसन ने 173 रन बनाए हैं. जिसमें 2 अर्धशतक शामिल है. इस दौरान उनका सर्वोच्च स्कोर 57 रन है.

सूर्यवंशी का दमदार करियर-
वैभव सूर्यवंशी ने अब तक 8 इंटरनेशनल टी20 मैच खेले हैं. ये सभी मुकाबले उन्होंने विदेशी धरती पर खेले हैं. इसमें उन्होंने 246 रन बनाए हैं. इस दौरान सूर्यवंशी ने 2 अर्धशतक लगाए हैं. उनका सर्वोच्च स्कोर 81 रन है. सूर्यवंशी का औसत 30.75 का रहा है. जबकि उनका स्ट्राइक रेट 186.36 का रहा है.

संजू पर भारी सूर्यवंशी-
छोटे से टी20 करियर में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन संजू सैमसन से बेहतर रहा है. अगर पिछले 4 मैचों की बात करें तो संजू ने सिर्फ 29 रन बनाए हैं. जबकि पिछले 4 मैचों में सूर्यवंशी ने 154 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने अपने करियर का सबसे बड़ा स्कोर भी बनाया. उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 49 गेंदों में 81 रनों की पारी खेली थी.

संजू सैमसन के लगातार फ्लॉप शो के बाद सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा फूट रहा है. फैंस सवाल उठा रहे हैं कि आखिर संजू सैमसन को क्यों बार-बार मौका मिला है? जबकि वैभव सूर्यवंशी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह पक्की क्यों नहीं है?

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