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Humans vs AI: हमसे गलती हो गई... फोर्ड ने माना एआई के भरोसे गाड़ियां बनाना पड़ा भारी, पुराने स्टाफ को वापस बुलाकर सुधारी भूल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इनसानों का विकल्प मानने वाली सोच पर अब बड़ सवाल उठ रहा है. फोर्ड ने AI से उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने पर करीब 350 अनुभवी इंजीनियरों को वापस काम पर रखा. इससे साफ है कि AI उपयोगी है, लेकिन इंसानी क्रिएटिविट की जगह नहीं ले सकता.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में बहस छिड़ी हुई है. एआई को लेकर इंसानी क्षमता के मुकाबले ज्यादा बेहतर मान कर जितनी तेजी से प्रयोग हो रहे हैं, उतनी ही तेजी से कई कंपनियों को यह भी समझ आ रहा है कि हर काम सिर्फ AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अब अमेरिका की दिग्गज कार निर्माता कंपनी फोर्ड का उदाहरण ही ले लीजिए. पहले कंपनी ने कई कर्मचारियों को एआई का हवाला देकर काम से निकाल दिया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्हें इंसानी कार्यक्षमता की कीमत समझ आ गई. शुरू में उन्होंने अपने AI और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम पर भरोसा किया, लेकिन जब उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले तो उसे फिर से इंसानी अनुभव की जरूरत महसूस हुई और निकाले गए एम्पलाई को वापिस बुला लिया.

350 अनुभवी इंजीनियरों की हुई वापसी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, फोर्ड ने पिछले तीन सालों में करीब 350 अनुभवी इंजीनियरों को दोबारा काम पर रखा है. इनमें कंपनी के पुराने कर्मचारी भी शामिल हैं और सप्लायर कंपनियों के अनुभवी एक्सपर्ट्स भी. कंपनी का मानना है कि सिर्फ मशीनों के भरोसे क्वालिटी कंट्रोल करना आसान नहीं है. कई जगह इंसानी अनुभव और समझ आज भी अहम भूमिका निभाते हैं. फोर्ड का कहना है कि इन इंजीनियरों की वापसी का असर अब दिखने भी लगा है. कंपनी को JD Power के हालिया Initial Quality Survey में मुख्यधारा के ब्रांड्स में टॉप स्थान मिला है. साथ ही उत्पादन लागत में भी कमी आई है.

AI से हर समस्या का हल नहीं मिला
फोर्ड ने अपने क्वालिटी सिस्टम में AI और ऑटोमेशन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया था. उम्मीद थी कि इससे कारों की गुणवत्ता और बेहतर होगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं हो पाया. इसके बाद कंपनी ने दोबारा अनुभवी लोगों को टीम में शामिल करने का फैसला लिया. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट चार्ल्स पून ने ब्लूमबर्ग से कहा, "हमने गलत सोच लिया था कि सिर्फ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने और हमारे पास मौजूद डिज़ाइन की ज़रूरतों को उसमें डालने से ही एक बेहतरीन क्वालिटी वाला प्रोडक्ट बन जाएगा." उन्होंने आगे कहा, "AI एक शानदार टूल है, लेकिन यह उतना ही अच्छा काम करता है जितनी अच्छी जानकारी का इस्तेमाल इसे ट्रेन करने के लिए किया जाता है."

फोर्ड के इस फैसले का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि AI का दौर खत्म हो गया है. AI आज भी कई क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है और लोगों की मदद कर रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि कंपनियां अब यह समझने लगी हैं कि हर काम में इंसान की जगह मशीन नहीं ले सकती. बीते दिनों इसका दूसरा पहलू भी देखने को मिला, जब एक AI चैटबॉट ने अदालत में इंसानी वकील के खिलाफ करीब तीन घंटे तक बहस की और लगभग 7,000 पाउंड (करीब 8.79 लाख रुपए) के केस में जीत दर्ज की.

AI को एआई टूल की तरह इस्तेमाल करना ही समझदारी
AI का सबसे अच्छा इस्तेमाल तब होता है, जब वह इंसान के काम को आसान और बेहतर बनाए. लेकिन अगर हर फैसले और हर जिम्मेदारी को पूरी तरह AI के भरोसे छोड़ दिया जाए, तो कई बार नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते. इसे ऐसे समझिए कि आपने एआई को ट्रेंडिंग डिजाइन बनाने बोला और उसी हिसाब से एआई को ट्रेन भी किया. लेकिन जब ट्रेंड चला गया तो कुछ नया बनाना है. ऐसे में एआई ट्रेंड तो समझता है, लेकिन इंसानी भावना को समझ कर उसे डिजाइन नहीं कर सकता. डिजाइन को इंसानी भावना से समझने के लिए इंसान चाहिए. 
 

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