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Ropeways Technology: आखिर क्या है रोपवे का रॉकेट साइंस, सैकड़ों फीट ऊपर हवा में कैसे चलती है केबल कार? जानिए अंदर की टेक्नोलॉजी

Cable Car: जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में गोंडोला केबल कार सेवा में तकनीकी खराबी आने के बाद करीब 300 पर्यटकों की मानो सांसे थम गई थीं. इस घटना के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर रोपवे का रॉकेट साइंस क्या है? कैसे सैकड़ों फीट ऊपर हवा में केबल कार चलती है और वजन उठा पाती है? हम आपको बता रहे हैं, इन सवालों के जवाब.

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Cable Car Cable Car

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में रोपवे (Ropeway) यानी गोंडोला केबल कार (Gondola Cable Car) सेवा में तकनीकी खराबी आने के बाद करीब 300 पर्यटकों की मानो सांसे थम गई थीं. पर्यटकों के केबल कार में फंसे होने की सूचना पर तुरंत सेना, पुलिस, NDRF और SDRF की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला और कुछ ही घंटों में सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया. फिलहाल गोंडोला केबल कार में खराबी के चलते सेवा रोक दी गई है. इस घटना के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर रोपवे का रॉकेट साइंस क्या है? कैसे सैकड़ों फीट ऊपर हवा में केबल कार चलती है और वजन उठा पाती है? हम आपको इन सवालों का जवाब बता रहे हैं.

आखिर कैसे काम करती है रोपवे टेक्नोलॉजी
मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन तालमेल रोपवे या गोंडोला केबल कार प्रणाली है. इसमें हर स्टेशन पर पहिए यानी ड्राइविंग पुली लगे होते हैं. इन पहिए को इलेक्ट्रिक मोटर घुमाती है. इन पहियों के चारों ओर एक कंटीन्यूअस लूप वाली मजबूत स्टील केबल चारों ओर चक्कर लगाती है. मुख्य मोटर जब पुली को चलाती है तो वह पूरी स्टील केबल को आगे खींचती है. इससे मुख्य केबल से मजबूती से जुड़े हुए केबिन एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की तरफ बढ़ते हैं.

कैसे होती है रोपवे की स्पीड कंट्रोल 
आपको मालूम हो कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए मॉर्डन रोपवे में डिटेचेबल मैकेनिज्म तकनीक का उपयोग किया जाता है.  डिटेचेबल मैकेनिज्म तकनीक में कोई केबिन जब किसी स्टेशन पर पहुंचता है तो वह एक विशेष ग्रिप की मदद से मुख्य तेज रफ्तार केबल से अपने आप अलग हो जाता है. स्टेशन के अंदर छोटे-छोटे टायर लगे होते हैं. ये टायर केबिन को एकदम धीमी गति से आगे बढ़ाते हैं ताकि यात्री आराम से उतर और चढ़ सकें. 

केबिन जब वापस जाने के लिए स्टेशन से निकलता है तो यही टायर उसकी स्पीड बढ़ाते हैं और वह फिर से मुख्य केबल से मजबूती से जुड़ जाता है. दो रोपवे स्टेशन के बीच के लंबे रास्ते में केबल को हवा में सहारा देने के लिए जगह-जगह बड़े खंभे यानी टावर लगाए जाते हैं. इन टावरों के ऊपरी हिस्से पर रबर और स्टील से बने रोलर्स लगे होते हैं. इन रोलर्स पर केबल आसानी से आगे फिसलती है. ये रोलर्स केबल को हवा में एक निश्चित ऊंचाई और सही रास्ते पर बनाए रखते हैं ताकि वह नीचे न लटके. इन टावरों के चलते ही केबल कारें बिना किसी रुकावट के सैकड़ों फीट की ऊंचाई पर आवागमन कर पाती हैं.

कितने यात्री बैठ सकते हैं एक केबल कार में 
एक केबल कार या एक केबिन में 6 से 8 लोग आसानी से बैठ सकते हैं. वजन की बात करें तो एक केबल कार में 600 से 800 किलोग्राम तक वजन उठा सकती है. आपको मालूम हो कि पूरी रोपवे लाइन पर एक साथ कई केबल कार चलती हैं. ऐसे में मुख्य स्टील केबल को इस तरह बनाया जाता है कि वह कई टन का वजन और हवा का भारी दबाव एक साथ झेल सके. 

सुरक्षा का विशेष ध्यान
यात्रियों की सुरक्षा ब्रेक का विशेष ध्यान रखा जाता है. यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई स्तर के सुरक्षा घेरे और ऑटोमैटिक ब्रेक शामिल होते हैं. यदि कभी बिजली गुल हो जाए या मोटर में खराबी आ जाए तो सिस्टम में लगे आपातकालीन ब्रेक तुरंत एक्टिव हो जाते हैं और केबल कार को वहीं रोक देते हैं. इतना ही नहीं मुख्य मोटर फेल होने की स्थिति में बैकअप के तौर पर एक दूसरा डीजल इंजन भी हमेशा तैयार रखा जाता है. यह बैकअप इंजन धीमी गति से केबल को चलाकर हवा में फंसे केबिनों को सुरक्षित रूप से नजदीकी स्टेशन तक पहुंचाने का काम करता है.

रोपवे सिस्टम में खराबी के प्रमुख कारण  
1. रोपवे सिस्टम में खराबी आने के कई तकनीकी कारण हो सकते हैं. 
2. कई बार अचानक तेज हवा चलने या मौसम खराब होने से सेंसर सुरक्षा के लिहाज से सिस्टम को खुद ही लॉक कर देते हैं. 
3. कभी-कभार केबल को घुमाने वाले पहियों में खराबी आ जाती है. 
4. बिजली की सप्लाई बाधित होने या इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल पैनल में गड़बड़ी आने पर केबल कार बीच रास्ते में रुक जाती है.