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What is URL Phishing: क्या है फिशिंग यूआरएल, जिसके झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गवां बैठते हैं लोग

ऑनलाइन ठगी करने के लिए जालसाज ऐसे ऐसे फार्मूले अपना रहे हैं कि कोई भी इनके झांसे में आ जाए. साइबर अपराध के आंकड़ों की मानें तो 35 फीसदी साइबर क्राइम फिशिंग यूआरएल के जरिए अंजाम दिए जा रहे हैं.

Phishing URL Phishing URL
हाइलाइट्स
  • फिशिंग यूआरएल के जरिए लोगों से हो रहा फ्रॉड

  • इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

तमाम जागरुकता अभियानों के बाद भी साइबर अपराधों के मामलों में कमी नहीं हो रही है. साइबर अपराधों की घटनाओं में करीब एक तिहाई से ज्यादा मामलों में फिशिंग यूआरएल के जरिए लोगों को चूना लगाया जा रहा है. क्या होता है फिशिंग यूआरएल और इसमें अपराधी किस तरह से ऑन लाइन फ्रॉड को अंजाम देते हैं आइए जानते हैं...

फिशिंग यूआरएल को समझिए
फिशिंग यूआरएल  (URL Phishing) एक तरह का फ्रॉड लिंक होता है, जिसकी मदद से आपकी निजी जानकारी मांगी जाती है. फिशिंग यूआरएल पर क्लिक करते ही आप फेक वेब पर पहुंच जाते हैं. अगर आप इसमें अपनी जानकारी भर देते हैं तो यह हैकर के सर्वर में सेव हो जाती है. वह जब चाहे आपकी जानकारी का इस्तेमाल फ्रॉड करने के लिए कर सकता है.

ईमेल भेजकर होता है साइबर अपराध
इसके अलावा आपके ईमेल में कई बार अटैमचेंट भी भेजे जाते हैं, जिसे डाउनलोड करने को कहा जाता है. यह भी एक तरह का फिशिंग यूआरएल होता है. इस डाउनलोड को खोलते ही आपके सिस्टम या फोन में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है. और आपके फोन की हर जानकारी जैसे यूपीआई, डेबिट कार्ड नंबर, अकाउंट डीटेल, सब कुछ पर हैकर की नजर में रहती है. मौका मिलते ही हैकर्स आपके अकाउंट से पैसे गायब कर देते हैं और पता भी नहीं चलता.

फिशिंग यूआरएल के चर्चित फार्मूले 

  • अक्सर इनाम जीतने के मैसेज के साथ फिशिंग यूआरएल का लिंक होता है.

  • फर्जी शॉपिंग साइट्सपर मिलने वाले लुभावने ऑफर्स के साथ.

  • आधार कार्ड, केवाईसी अपग्रेड, नौकरी पंजीकरण के साथ आने वाले मैसेज के साथ.

इन बातों का रखें ध्यान