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Varanasi Dev Deepawali Travel Guide: देव दीपावली पर जा रहे काशी? बनारस के पास ही मौजूद हैं ये 5 धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर, जरूर घूमने जाएं

साल 2026 में 24 नवंबर को मनाई जाने वाली काशी की देव दीपावली बेहद खास होती है. इस आयोजन को देखने अगर काशी जा रहे हैं, तो शाम के मुख्य आयोजन से पहले पर्यटक आसपास के 5 प्रमुख स्थलों की सैर कर सकते हैं. ये सभी स्थान काशी विश्वनाथ मंदिर और घाट के आस-पास 3 से 50 किमी के दायरे में आते हैं.

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काशी की देव दीपावली काशी की देव दीपावली

काशी की देव दीपावली एक ऐसा अवसर है, जब पूरा बनारस दूल्हे के सेहरे की तरह सजा नजर आता है. इस दिन मंदिरों और घाटों पर दीप जलाए जाते हैं, आतिशबाजी होती है और लोग अपने घरों में भी विशेष पूजा-पाठ करते हैं. साल 2026 में देव दीपावली 24 नवंबर को मनाई जाएगी.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था. इस जीत की खुशी में देवताओं ने काशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया था. ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता भी गंगा में स्नान करने और दीपदान के लिए काशी आते हैं. इसी वजह से कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली देव दीपावली का खास धार्मिक महत्व माना जाता है. इस आयोजन में स्थानीय लोग तो शामिल होते ही हैं, लेकिन इस खास पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से पर्यटक भी बनारस पहुंचते हैं. शाम के समय घाटों पर दीपों की रोशनी और गंगा आरती का नजारा देखते ही बनता है.

देव दीपावली का मुख्य आयोजन शाम को होता है. ऐसे में दिनभर होटल के कमरे में बैठे रहने के बजाय आप बनारस के आसपास मौजूद इन पांच धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों की सैर कर सकते हैं-

1. विंध्याचल धाम
मां के दर्शन करने की इच्छा है, तो बनारस से विंध्याचल धाम की ओर रुख कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है. यहां मां विंध्यवासिनी के दर्शन के साथ काली खोह और अष्टभुजा देवी के दर्शन भी कर सकते हैं. विंध्याचल को शक्तिपूजा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. नवरात्र के दिनों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. अगर आप देव दीपावली के दिन बनारस में हैं, तो दिन के समय ऑटो लेकर यहां जरूर जाएं.

2. सारनाथ
नारस के पास ऐसी जगह घूमना चाहते हैं, जहां धर्म के साथ इतिहास भी देखने को मिले, तो सारनाथ जरूर जाएं. बौद्ध धर्म के इतिहास के लिए ये जगह जानी जाती है. मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहीं दिया था. सारनाथ में धमेख स्तूप, प्राचीन बौद्ध अवशेष और पुरातत्व संग्रहालय देखने लायक हैं. अगर आप धार्मिक स्थलों के साथ प्राचीन इतिहास और बौद्ध संस्कृति को भी करीब से समझना चाहते हैं, तो दिन के वक्त यहां जा सकते हैं. ये जगह बनारस के करीब भी है.

3. चंदौली के राजदरी और देवदरी जलप्रपात
देव दीपावली के दिन मंदिरों और घाटों के अलावा अगर प्राकृतिक नजारे भी देखना चाहते हैं, तो चंदौली जिले के राजदरी और देवदरी जलप्रपात जा सकते हैं. ये दोनों जलप्रपात चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य के क्षेत्र में स्थित हैं. यहां चट्टानों से गिरता पानी, आसपास फैले जंगल और प्राकृतिक सुंदरता सुकून का एहसास कराते हैं.

4. काशी नरेश का निवास स्थान, रामनगर किला
काशी के पुराने राजसी इतिहास को जानना है, तो रामनगर किला देख सकते हैं. गंगा के पूर्वी किनारे पर स्थित इस किले का निर्माण 18वीं सदी में काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह ने कराया था. इसकी बनावट में मुगल स्थापत्य शैली की झलक दिखाई देती है. किले के भीतर संग्रहालय भी है, जहां पुराने शाही सामान, पालकियां, हथियार, घड़ियां और अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं देखी जा सकती हैं. यहां का परिसर बनारस के राजघराने से जुड़े इतिहास की झलक देता है. गंगा के किनारे इसकी स्थिति भी इसे खास बनाती है. 

5. काल भैरव मंदिर और काशी के प्रमुख घाट
काशी की यात्रा के दौरान काल भैरव के दर्शन का खास महत्व है. इन्हें काशी का कोतवाल कहते हैं. मान्यता है कि इनके इजाजत के बिना कोई काशी में प्रवेश नहीं कर सकता है. काल भैरव काशी की रक्षा करते हैं. यही वजह है कि इस मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं.

मंदिर के दर्शन के बाद समय मिले, तो मणिकर्णिका घाट और राजा हरिश्चंद्र घाट भी जाएं. मणिकर्णिका घाट काशी के प्राचीन और महत्वपूर्ण श्मशान घाटों में से एक है. वहीं, राजा हरिश्चंद्र घाट का संबंध सत्य और धर्म के प्रतीक और राजा राम के पूर्वज राजा हरिश्चंद्र की कथा से जुड़ा है. 

देव दीपावली के समय घाटों पर भीड़ काफी बढ़ सकती है. इसलिए मंदिर और घाटों के दर्शन के लिए पर्याप्त समय रखें और शाम के मुख्य आयोजन तक पहुंच जाएं.
 

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