CR Park Heritage Walk
CR Park Heritage Walk
दिल्ली के मिनी बंगाल कहे जाने वाले चित्तरंजन पार्क (CR Park) में दिल्ली टूरिज्म की ओर से खास हेरिटेज वॉक की शुरुआत की गई है. इस वॉक के जरिए लोगों को बंगाली संस्कृति, दुर्गा पूजा की परंपराओं और मां दुर्गा की मूर्ति बनाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानने का मौका मिल रहा है. 11 से 19 अक्टूबर के बीच कुल सात हेरिटेज वॉक आयोजित की जा रही हैं. इस दौरान लोग CR Park के प्रसिद्ध काली मंदिर को देखने के साथ बंगाली संस्कृति से जुड़ी कई दिलचस्प बातें भी जान रहे हैं.
1. कैसे तैयार होती है मां दुर्गा की मूर्ति?
हेरिटेज वॉक के दौरान गाइड जय सीमा ने बताया कि मां दुर्गा की मूर्ति बनाने की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं. सबसे पहले बांस का ढांचा तैयार किया जाता है. इसके बाद जूट की मदद से मूर्ति को आकार दिया जाता है और फिर उस पर मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है. यहां हर साल करीब 800 मूर्तियां बनाई जाती हैं. मूर्तियां तैयार करने के लिए मिट्टी हरियाणा और पंजाब से मंगाई जाती है. मूर्ति बनाने की प्रक्रिया में सबसे आखिर में मां दुर्गा की आंखें बनाई जाती हैं.
2. इस पंडाल में पूजा के दौरान क्यों नहीं बनता नॉनवेज?
हेरिटेज वॉक के दौरान गाइड कृतिका ने लोगों को बंगाली खानपान और मंदिर में तैयार होने वाले भोग के बारे में बताया. इस दौरान काली बाड़ी मंदिर की एक खास परंपरा के बारे में भी जानकारी मिली. दुर्गा पूजा के दौरान इस मंदिर में तैयार होने वाला भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है. इसकी वजह मंदिर के पास स्थित जगन्नाथ मंदिर है. इस परंपरा के जरिए लोगों को यहां की धार्मिक मान्यताओं और पूजा से जुड़ी परंपराओं के बारे में जानने का मौका मिला.
3. मां दुर्गा को क्यों कहा जाता है महिषासुरमर्दिनी?
हेरिटेज वॉक के दौरान गाइड कामना ने लोगों को मां दुर्गा और महिषासुर की पौराणिक कथा सुनाई. मान्यता के अनुसार, महिषासुर को वरदान मिला था कि कोई पुरुष उसका वध नहीं कर सकता. इसके बाद देवी दुर्गा ने अपनी दस भुजाओं में अलग-अलग अस्त्र धारण किए और महिषासुर का वध किया. इसी वजह से मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है. इस कहानी के जरिए लोगों को मां दुर्गा की शक्ति और दुर्गा पूजा से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के बारे में बताया गया.
4. रवींद्रनाथ टैगोर के घर की थीम पर पंडाल और अकालबोधन की कहानी
CR Park में दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग थीम पर पंडाल सजाए जाते हैं. हेरिटेज वॉक में गाइड जय सीमा ने लोगों को इन पंडालों के जरिए बंगाल की कला, साहित्य और परंपराओं की झलक दिखाई. इस दौरान रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी कला और बंगाली संस्कृति को भी करीब से जानने का मौका मिला. पंडाल की सजावट के जरिए बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को दिखाया गया. इसके साथ ही लोगों को अकालबोधन की कहानी के बारे में भी जानकारी दी गई.
5. क्या है बंगाल की पारंपरिक अल्पना आर्ट?
हेरिटेज वॉक के दौरान गाइड अब्दिका शर्मा ने लोगों को बंगाल की पारंपरिक अल्पना कला के बारे में बताया. इस कला में चावल के घोल की मदद से जमीन पर फूलों और अलग-अलग तरह की सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं. बंगाली परिवारों में पूजा और शुभ अवसरों पर घरों और मंदिरों को सजाने के लिए अल्पना कला का इस्तेमाल किया जाता है. यह बंगाली संस्कृति और परंपराओं का एक खास हिस्सा है.
500 रुपये और GST में शामिल हो सकते हैं हेरिटेज वॉक में
दिल्ली टूरिज्म की ओर से आयोजित इस हेरिटेज वॉक का मकसद लोगों को दुर्गा पूजा के साथ बंगाली संस्कृति और उससे जुड़ी पुरानी परंपराओं के बारे में जानकारी देना है. इस दौरान प्रतिभागियों को मां दुर्गा की मूर्ति बनाने की प्रक्रिया, मंदिर की परंपराओं, पौराणिक कथाओं और बंगाल की पारंपरिक कला के बारे में जानने का मौका मिल रहा है. इस हेरिटेज वॉक में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति 500 रुपये और GST शुल्क रखा गया है.
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