त्रियुंड में कैंपिंग पर लगाम लगाने की तैयारी, 240 टेंट से अधिक की नहीं होगी अनुमति
त्रियुंड में कैंपिंग पर लगाम लगाने की तैयारी, 240 टेंट से अधिक की नहीं होगी अनुमति
पर्यटन की बढ़ती आमद के बीच त्रियुंड के प्राकृतिक स्वरूप, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने कैंपिंग और ट्रैकिंग गतिविधियों को नियमित करने की तैयारी शुरू कर दी है. त्रियुंड में अनियंत्रित कैंपिंग पर अंकुश लगाने के साथ ही ट्रैकर्स की सुरक्षा, स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके तहत कैंपिंग के लिए टेंट की अधिकतम सीमा तय करने, पंजीकृत और प्रशिक्षित गाइड के माध्यम से पर्यटकों को ट्रैक पर भेजने तथा बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है.
धर्मशाला के डीएफओ अमित शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) की ओर से त्रियुंड में अनियंत्रित कैंपिंग को लेकर प्रतिनिधित्व दिया गया था. इसके बाद होटल एसोसिएशन और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े संचालकों के साथ बैठक की गई। बैठक में त्रियुंड के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने और वहां होने वाली गतिविधियों को व्यवस्थित करने पर चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि त्रियुंड हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. यह वन क्षेत्र होने के साथ-साथ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी है. ऐसे में यहां बढ़ती पर्यटक गतिविधियों के कारण पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और नीचे के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए कैंपिंग और ट्रैकिंग को नियमित करना जरूरी है.
तीन हेक्टेयर क्षेत्र में अधिकतम 240 टेंट लगाने की योजना
डीएफओ अमित शर्मा के अनुसार, त्रियुंड के ग्लेड क्षेत्र में कैंपिंग के लिए तीन हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है. यहां प्रति हेक्टेयर 80 टेंट की कैरिंग कैपेसिटी तय की गई है. इस हिसाब से कुल 240 टेंट ही लगाने की अनुमति देने की योजना है. इन टेंटों की व्यवस्था पंजीकृत संचालकों के बीच निर्धारित मानकों के अनुसार वितरित की जाएगी, ताकि कैंपिंग गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके.
पंजीकृत और प्रशिक्षित गाइड के माध्यम से होगी ट्रैकिंग
उन्होंने बताया कि त्रियुंड जाने वाले हाइकर्स और ट्रैकर्स के लिए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया जा रहा है. इसके तहत पर्यटकों को प्रशिक्षित और पंजीकृत टूरिस्ट गाइड के माध्यम से ट्रैकिंग तथा कैंपिंग के लिए भेजने की योजना है. संबंधित संचालकों का इको-टूरिज्म सोसाइटी के साथ पंजीकरण भी किया जाएगा. इससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गतिविधियों की निगरानी में मदद मिलेगी.
डीएफओ ने बताया कि संबंधित संचालकों से आवेदन मांगे गए हैं. माउंटेनियरिंग संस्थान से प्रशिक्षित अथवा पर्यटन विभाग के पास संबंधित गतिविधियों के लिए पंजीकृत संचालक आवेदन कर सकेंगे. आवेदन प्राप्त होने के बाद पंजीकृत संचालकों की संख्या के आधार पर उनके लिए टेंट लगाने की दैनिक सीमा निर्धारित की जाएगी. पंजीकरण की अवधि तीन साल रखने का प्रस्ताव है, जबकि फीस और नवीनीकरण शुल्क को लेकर अंतिम निर्णय गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद लिया जाएगा.
छह बायो-डाइजेस्टर शौचालय और पानी की सुविधा मिलेगी
त्रियुंड में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए छह बायो-डाइजेस्टर शौचालय स्थापित करने की योजना है. इसके साथ ही पर्यटकों के लिए पानी की व्यवस्था करने का भी प्रावधान किया जाएगा. इन सुविधाओं का उद्देश्य पर्यटक गतिविधियों से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और स्वच्छता बनाए रखना है.
प्रतिदिन 1000 पर्यटकों की सीमा को मिली सराहना
डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि वन विभाग की ओर से त्रियुंड ट्रैक पर प्रतिदिन अधिकतम 1000 पर्यटकों की आवाजाही की व्यवस्था को लेकर किसी भी हितधारक ने आपत्ति नहीं जताई है. उन्होंने कहा कि त्रियुंड की वैज्ञानिक आधार पर निर्धारित कैरिंग कैपेसिटी के अनुसार गल्लू की ओर से 500 और भागसूनाग की ओर से 500 पर्यटकों को प्रतिदिन जाने की अनुमति का प्रावधान किया गया है. बैठक में शामिल हितधारकों और होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था की सराहना की है. उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य त्रियुंड के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके.
ये भी पढ़ें: