scorecardresearch

होली में यूपी-बिहार लौटने वाले मुसाफिरों के लिए क्या है सूरत के उधाना रेलवे स्टेशन पर तैयारी? मुंबई डीआरएम ने बताया

होली के त्योहार में यूपी, बिहार और झारखंड जाने वाले मुसाफिरों की संख्या काफी ज्यादा होती है. ऐसे में रेलवे को इसके लिए विशेष तैयारी करनी पड़ती है. गुजरात से सूरत में भी इन इलाकों के लाखों लोग रहते हैं. सूरत के उधना स्टेशन पर होली को लेकर खास तैयारी की गई है. हर तरह की तैयारी की गई है.

Indian Railways Indian Railways

होली के मौके पर यूपी, बिहार और झारखंड जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ सूरत के उधना स्टेशन पर उमड़ती है. उधना स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने खास तैयारियां की है. रेलवे की तैयारियों को लेकर मुंबई मंडल के डीआरएम पंकज सिंह ने सबकुछ बताया. उन्होंने बताया कि जो विशेष ट्रेनें चलानी पड़ेंगी, उसके लिए हमारी पूरी व्यवस्था है. बिजली, पंखे, पानी और स्थायी शौचालय की व्यवस्था है.

दिवाली-छठ पर की थी विशेष तैयारी- DRM
डीआरएम पंकज सिंह ने कहा कि सूरत और उधना में लाखों लोग रहते हैं, जो पूर्वी भारत और उत्तरी भारत से आते हैं और यहां काम करते हैं. वे उत्सवों के मौसम में वापस जाते हैं. उन्होंने बताया कि दिवाली और छठ के समय काफी भीड़ उमड़ी थी. हमने काफी मेहनत की थी और क्रमबद्ध तरीके से लोगों को (ट्रेनों में) बिठाया था, जिसकी वजह से लंबी लाइनें लगी थीं. दिवाली-छठ के दौरान जो सबसे ज़्यादा भीड़ वाला दिन था, उस दिन करीब 35,000 से 36,000 लोग आए थे. हमने विशेष ट्रेनें चलाने की पूरी तैयारी की थी. हम पहले से ही तैयारी करके विशेष रैक मंगवा लेते हैं, उनकी पूरी जांच करके उन्हें तैयार रखते हैं. जैसे-जैसे भीड़ आती है, हम उन्हें बिठाकर भेजते रहते हैं. उस पीक डे पर भी हमने शाम 4:00 बजे तक सभी यात्रियों को सुव्यवस्थित ढंग से उनके गंतव्य स्थानों के लिए रवाना कर दिया था. 

होली के लिए भी खास तैयारी- डीआरएम
डीआरएम पंकज सिंह ने बताया कि इस बार भी हम बिल्कुल वैसी ही ड्रिल करेंगे. हमारे पास विशेष रैक उपलब्ध हैं और ट्रेनों की नोटिफिकेशन भी हो चुकी है. अंत्योदय और ताप्ती गंगा के अलावा, इस रविवार (1 तारीख) को जो भी विशेष ट्रेनें चलानी पड़ेंगी, उनके लिए हमारी पूरी व्यवस्था है.

अस्थाई होल्डिंग एरिया बनाया है- डीआरएम
उन्होंने बताया कि हमारा एक स्थायी होल्डिंग एरिया था, जो करीब 2,500 लोगों की क्षमता वाला था, जहाँ बिजली, पंखे, पानी और स्थायी शौचालय की व्यवस्था थी. पिछले दिवाली-छठ के बाद हमने उस क्षेत्र को अब दोगुना कर दिया है. अब वहां करीब 4,000 से 5,000 लोग समा सकते हैं. अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाया है, जहाँ हमने वहां बड़े टेंट लगाए हैं और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था की है. टीटीई, आरपीएफ, जीआरपी और सिटी पुलिस के साथ समन्वय करके पूरी प्लानिंग की गई है. आवश्यकतानुसार विशेष ट्रेनें चलाने के लिए हम पूरी तरह तैयार और आश्वस्त हैं.

अधिक रिजर्व्ड ट्रेनों की जरूरत- डीआरएम
उन्होंने बताया कि भीड़ तो रहेगी ही, क्योंकि हमें अनारक्षित (unreserved) विशेष ट्रेनें भी चलानी पड़ती हैं, जो उन लोगों के लिए होती हैं जो आखिरी समय पर बिना टिकट के आते हैं और स्टेशन पर टिकट खरीदते हैं. वहां और अधिक आरक्षित ट्रेनों के परिचालन की आवश्यकता है. मुंबई डिवीजन की ओर से हम इसकी मांग नियमित रूप से पश्चिम रेलवे मुख्यालय को भेजते रहते हैं, और वहां से इसे रेलवे बोर्ड को भेजा जाता है. अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड का होता है क्योंकि इसमें मार्ग और गंतव्य स्टेशनों (जैसे समस्तीपुर, भागलपुर, जयनगर) पर ट्रेनों को संभालने की क्षमता का भी ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन, जिस तरह से उधना स्टेशन की क्षमता बढ़ी है (हाई लेवल प्लेटफॉर्म, शेड्स, नया प्लेटफॉर्म नंबर 6), यह निश्चित है कि अगले एक-डेढ़ साल में उत्तर और पूर्व की ओर जाने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी.

(संजय सिंह राठौड़ की रिपोर्ट)

ये भी पढ़ें: