Hill stations
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मानसून में पहाड़ों की खूबसूरती ही कुछ अलग होती है, लेकिन इस मौसम में यहां का सफर काफी जोखिम भरा भी हो सकता है. पहाड़ी इलाकों में मौसम अचानक बदलने के साथ ही तेज बारिश, भूस्खलन, सड़क बंद होने और अचानक बढ़ते जलस्तर जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसे में अगर आप बारिश के मौसम में पहाड़ों घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
मौसम और सड़क की जानकारी जरूर लें
घर से निकलने से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी जरूर देखें. जिस रास्ते से जाना है, वहां सड़क खुली है या नहीं, इसकी जानकारी प्रशासन या संबंधित विभाग से लें. भारी बारिश के कारण कई बार सड़कें घंटों या कई दिनों तक बंद हो जाती हैं. मौसम खराब होने की चेतावनी हो तो यात्रा टालना ही बेहतर है.
प्रशासन की एडवाइजरी को नजरअंदाज न करें
मानसून में जिला प्रशासन और मौसम विभाग समय-समय पर एडवाइजरी जारी करते हैं. अगर किसी इलाके में येलो, ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी है, तो इसे हल्के में न लें. प्रशासन जिन रास्तों पर जाने से मना करे, वहां जाने की कोशिश बिल्कुल न करें. सुरक्षित यात्रा के लिए सरकारी निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है.
रात में पहाड़ी सफर से बचें
बारिश के दौरान रात में पहाड़ों पर सफर करना ज्यादा खतरनाक हो सकता है. अंधेरे में सड़क पर गिरे पत्थर, भूस्खलन, पानी का बहाव और खराब रास्ता आसानी से दिखाई नहीं देता. कई जगह मोबाइल नेटवर्क भी नहीं मिलता. इसलिए कोशिश करें कि सुबह या दिन में ही यात्रा करें और शाम होने से पहले अपने गंतव्य तक पहुंच जाएं.
नदी-नालों का पानी पार करने की गलती न करें
बारिश के दौरान पहाड़ों के छोटे नाले भी अचानक तेज बहाव में बदल सकते हैं. पानी कम दिखाई देने पर भी उसे पार करने की कोशिश न करें. तेज बहाव वाहन और लोगों को बहा सकता है. रास्ते में पानी ज्यादा हो तो सुरक्षित जगह पर रुकें और जलस्तर कम होने का इंतजार करें.
यात्रा से पहले वाहन की जांच कराएं
पहाड़ी सफर पर निकलने से पहले वाहन के ब्रेक, टायर, हेडलाइट, वाइपर, बैटरी और इंजन की जांच जरूर करा लें. गीली सड़कों पर टायर की पकड़ कमजोर होने से फिसलने का खतरा बढ़ जाता है. वाहन में पर्याप्त ईंधन, स्टेपनी और जरूरी उपकरण भी रखें. अगर वाहन में कोई खराबी है, तो उसे ठीक कराने के बाद ही यात्रा पर निकलें.
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