Indian railway
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भारत में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. किसी के लिए ट्रेन यात्रा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, तो किसी के लिए यह बचपन की यादों से जुड़ी होती है. रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद प्लेटफॉर्म ढूंढना, अपनी ट्रेन का इंतजार करना, फिर कोच और सीट नंबर देखना, ये सब हर यात्री की यात्रा का अहम हिस्सा होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ट्रेन से आप सफर कर रहे हैं, उसे एक खास नंबर क्यों दिया गया है. इन पांच अंकों का क्या मतलब होता है? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं...
पहले चार अंकों में होती थी ट्रेनों की पहचान
भारतीय रेलवे में साल 1989 से 2010 तक लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों के लिए चार अंकों वाली नंबरिंग व्यवस्था इस्तेमाल होती थी. इन्हें यूनिवर्सल नंबर कहा जाता था. हालांकि, इस व्यवस्था में अलग-अलग रेलवे जोन में ट्रेन नंबर एक जैसे हो सकते थे. इससे ट्रेनों की पहचान और कंप्यूटर सिस्टम में रिकॉर्ड रखने में परेशानी होती थी.
इसी वजह से साल 2010 में रेलवे ने ट्रेन नंबरिंग सिस्टम में बदलाव किया और पांच अंकों वाली व्यवस्था लागू की. रेलवे मंत्रालय ने इसे ज्यादा वैज्ञानिक, तार्किक, एक समान और कंप्यूटर के अनुकूल बताया था. मौजूदा ट्रेनों के पुराने चार अंकों के नंबर के आगे सिर्फ 1 जोड़कर उन्हें पांच अंकों का बना दिया गया.
ट्रेन नंबर का पहला अंक क्या बताता है
ट्रेन नंबर का पहला अंक उसकी कैटेगरी के बारे में जानकारी देता है. 0 से शुरू होने वाली ट्रेनें आमतौर पर विशेष ट्रेनें होती हैं, जिन्हें गर्मी, त्योहार या छुट्टियों की भीड़ को देखते हुए चलाया जाता है.
1 से शुरू होने वाले नंबर लंबी दूरी की नियमित एक्सप्रेस, मेल और सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए इस्तेमाल होते हैं. इनमें राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, गरीब रथ और संपर्क क्रांति जैसी ट्रेनें शामिल हैं.
इसके अलावा 3 से कोलकाता की ट्रेन, 4 से चेन्नई, दिल्ली और दूसरे महानगरों की ट्रेनें, 5 से पैसेंजर ट्रेनें, 6 से MEMU और 7 से DMU तथा DEMU ट्रेनों की पहचान होती है. 9 से शुरू होने वाले नंबर मुंबई क्षेत्र की ट्रेनों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.
दूसरे और तीसरे अंक भी हैं खास
ट्रेन नंबर के दूसरे और तीसरे अंक मिलकर उसके रेलवे जोन और भौगोलिक क्षेत्र की जानकारी देते हैं. इनमें अलग-अलग अंक अलग रेलवे जोन से जुड़े होते हैं. जैसे 0 कोंकण रेलवे, 1 मध्य, पश्चिम-मध्य और उत्तर-मध्य रेलवे, 3 पूर्वी और पूर्व-मध्य रेलवे, 4 उत्तर रेलवे, उत्तर-मध्य और उत्तर-पश्चिम रेलवे से जुड़े होते हैं. इसी तरह 5 उत्तर-पूर्वी और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, 6 दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम रेलवे, 7 दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पश्चिम रेलवे, 8 दक्षिण-पूर्वी और पूर्व तटीय रेलवे तथा 9 पश्चिमी रेलवे सहित कुछ अन्य जोन से संबंधित होते हैं.
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