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अमेरिका और विश्‍व बैंक ने की अरबों डालर की योजना की घोषणा, दुनिया में चल रहे खाद्य संकट से निपटेंगे मिलकर

रूस और यूक्रेन दुनियाभर की गेहूं की आपूर्ति का एक तिहाई उत्पादन करते हैं. लेकिन दोनों के बीच युद्ध होने से अलग-अलग देशों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है. परिणामस्वरूप खाद्य कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.    

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Food Crisis Food Crisis
हाइलाइट्स
  • गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर पड़ रहा है प्रभाव

  • युद्ध का पड़ा है दूर देशों पर फर्क 

अमेरिका, वर्ल्ड बैंक और अन्य समूह आदि दुनिया में चल रहे खाद्य सुरक्षा संकट से निपटने के लिए आगे आए हैं. बुधवार को इन सभी ने अरबों डालर की योजना की घोषणा की है. इस योजना की घोषणा यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से उत्पन्न विश्वव्यापी खाद्य सुरक्षा संकट से निपटने के लिए की गई है. अमेरिका ने घोषणा करते हुए बताया कि कई वैश्विक विकास बैंक युद्ध से पैदा हुई भुखमरी, खाद्य सामान की बढ़ती लागत और फसलों को जलवायु से हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. 

कैसे-कैसे खर्च किए जाएंगे रुपये?

वर्ल्ड बैंक के ब्यान के मुताबिक, दस अरब डॉलर किसानों को समर्थन देने, उर्वरक आपूर्ति संकट को दूर करने और खाद्य उत्पादन के लिए भूमि विकसित करने के लिए खर्च किए जाएंगे. जहां, एशियाई विकास बैंक अफगानिस्तान और श्रीलंका को धन का योगदान देगा, वहीं अफ्रीकी विकास बैंक अफ्रीकी किसानों की सहायता के लिए 1.5 अरब डालर देगा. 

युद्ध का पड़ा है दूर देशों पर फर्क 

विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने एक बयान में कहा, "खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर पड़ रहा है. यह जरूरी है कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के जवाब में भविष्य के उत्पादन में वृद्धि के बारे में देश स्पष्ट बयान दें."

आपको बताते चलें कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और मॉस्को पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों ने दोनों देशों से गेहूं और अन्य खाद्य आपूर्ति को बाधित कर दिया है. इसकी वजह से ही विकासशील देशों में ईंधन और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन दुनियाभर की गेहूं की आपूर्ति का एक तिहाई उत्पादन करते हैं. लेकिन दोनों के बीच युद्ध होने से अलग-अलग देशों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है. परिणामस्वरूप खाद्य कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.