Tariq Rahman
Tariq Rahman
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहली बार हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को प्रचंड जीत मिली है. 13वें संसदीय चुनाव के लिए 299 सीटों पर गुरुवार को मतदान के बाद घोषित नतीजों में बीएनपी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बहुमत मिली है. ऐसे में BNP प्रमुख तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है. आइए जानते हैं आखिर कौन हैं तारिक रहमान और क्यों उन्हें 17 साल देश छोड़कर रहना पड़ा बाहर?
आपको मालूम हो कि यह चुनाव अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की देखरेख में कराया गया. इस चुनाव में लोगों ने दो मामलों पर वोट डाला- एक नई संसद चुनने के लिए और दूसरा संविधान में प्रस्तावित बदलावों (जुलाई चार्टर) पर राय देने के लिए. इस चुनाव में बीएनपी की प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत से कोसों दूर रह गया है. शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग यह चुनाव नहीं लड़ी हैं क्योंकि उसपर बैन लगा दिया गया है. शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से भारत सरकार की शरण में रह रही हैं. उन्होंने बांग्लादेश में हुए इस चुनाव को अवैध और असंवैधानिक करार दिया है. उन्होंने कहा कि चुनाव में बांग्लादेशी मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन हुआ.
तारिक रहमान दोनों सीटों से जीते
तारिक रहमान ने पहली बार बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दल बीएनपी का नेतृत्व किया है. इसके अलावा उन्होंने खुद भी पहली बार इस चुनाव में हिस्सा लिया. तारिक रहमान ने दो सीटों ढाका-17 और बोगुरा-6 से चुनाव लड़ा है और दोनों पर जीत दर्ज कर चुके हैं. आपको मालूम हो कि इस चुनाव से कुछ महीने पहले ही तारिक ने बीएनपी की कमान संभाली थी. पूरा चुनाव अभियान उनकी देख-रेख में ही चला है और आज उनकी पार्टी प्रचंड जीत दर्ज कर चुकी है. BNP ने बहुमत का 151 का आंकड़ा पार कर लिया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं और समर्थकों से जश्न नहीं मनाने की अपील की है. पार्टी ने कहा कि जीत का उत्सव मनाने के बजाय आज पूरे देश में समर्थक शुक्रवार की नमाज में शामिल होकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.
कौन हैं तारिक रहमान
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और तीन बार रहीं प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े पुत्र हैं. बीएनपी की वेबसाइट के मुताबिक तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को हुआ था. उस समय बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था. तारिक रहमान के पिता जनरल जियाउर रहमान 1975 में तख्तापलट के बाद सत्ता पर काबिज हुए थे. इस तख्तापलट के दौरान शेख हसीना के पिता और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद से आजतक जिया और हसीना परिवारों के बीच दुश्मनी चली आ रही है. जियाउर रहमान ने बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी की स्थापना की थी.
जियाउर रहमान 1977 से लेकर 1981 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे. जियाउर रहमान की एक सैन्य विद्रोह के दौरान चटगांव में 30 मई 1981 को हत्या कर दी गई थी. उसके बाद जियाउर रहमान की पत्नी खालिदा जिया ने पार्टी की कमान संभाली और तीन बार प्रधानमंत्री बनीं. तारिक रहमान के छोटे भाई का नाम अराफात रहमान कोको था, जिनका 2015 में थाइलैंड में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. तारिक रहमान की पत्नी का नाम जुबैदा रहमान और बेटी का नाम जैमा रहमान है. तारिक रहमान 2000 के दशक में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे. उन्हें उनकी मां खालिदा जिया का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. लेकिन उस समय ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि उन्हें 2008 में देश छोड़कर जाना पड़ा था.
तारिक रहमान को क्यों देश छोड़कर रहना पड़ा बाहर
तारिक रहमान को सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने साल 2007 में गिरफ्तार किया था. उन्हें कई क्रिमिनल केस में दोषी ठहराया गया था. मनी लॉन्ड्रिंग और शेख हसीना की हत्या की साजिश रचने जैसे आरोप तारिक पर लगे थे. तारिक को जेल भी जाना पड़ा था. तारिक लगभग 18 महीने जेल में रहे. इसके बाद साल 2008 में तारिक रहमान को जमानत मिली थी और वह इलाज के बहाने लंदन चले गए थे. इसके बाद से वह लंदन में ही निर्वासित जीवन बिता रहे थे. तारिक पर 2004 में तत्कालीन विपक्षी नेता शेख हसीना पर ग्रेनेड हमले की साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया था. हालांकि तारिक इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
तारिक रहमान की अनुपस्थिति में उन्हें उम्रकैद तक की सजा हुई थी. तारिक रहमान और उनकी पार्टी बीएनपी इसे राजनीतिक बदला बताती है. हसीना सरकार के दौरान तारिक लंदन से ही अपनी पार्टी का काम-काज वीडियो कॉल और सोशल मीडिय से देखते थे. साल 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान शेख हसीना की सत्त चली गई. हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत भागना पड़ा और बांग्लादेश में मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी. मुहम्मद यूनुस की सरकार ने तारिक तारिक रहमान पर लगे सभी आरोपों और सजा को वापस ले लिया था. इसके बाद ही तारिक स्वदेश लौटे. वह लंदन से 17 साल बाद 25 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश वापस लौटे थे.