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Bangladesh Election 2026: चुनावी मैदान में 1981 उम्मीदवार...  बांग्लादेश में बीएनपी या जमात किसकी बनेगी सरकार?

Bangladesh Election Result 2026 Date: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद गुरुवार को पहली बार बांग्लादेश में संसदीय चुनाव और जुलाई चार्टर रेफरेंडम के लिए मतदान हो रहा है. मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है. अब देखना है कि सरकार किसकी बनती है. चुनाव परिणाम शुक्रवार को आएंगे. आवामी लीग पर बैन लगने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ रही है. 

Bangladesh Election 2026 Bangladesh Election 2026

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद गुरुवार को पहली बार बांग्लादेश में संसदीय चुनाव और जुलाई चार्टर रेफरेंडम के लिए मतदान हो रहा है. पूर्व पीएम शेख हसीना की आवामी लीग पर बैन के बाद मुख्य मुकाबला तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और शफीकुर रहमान की पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच है. बांग्लादेश की सियासी लड़ाई दो बेगम के बाद अब दो रहमान के बीच सिमटती दिखाई दे रही है.

चुनावी मैदान में कुल 1981 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें करीब 1700 उम्मीदवार राजनीतिक दलों से हैं और 249 निर्दलीय हैं. अब देखना है कि किसको-किसको जीत मिलती है और किसकी सरकार बनती है. चुनाव परिणाम शुक्रवार को आएंगे. बांग्लादेश की जातीय संसद में कुल 300 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 151 है. शेरपुर जिले में जमात उम्मीदवार के निधन के बाद इस बार कुल 299 सीटों पर ही वोटिंग हो रही है. आपको मालूम हो कि बांग्लादेश में कोई विधानसभा या कोई मुख्यमंत्री नहीं होता है, यहां सबसे पावरफुल संसद होता है. भारत की तरह बांग्लादेश में दो सदन (लोकसभा और राज्यसभा) नहीं होते हैं, बल्कि वहां एक ही सदन होता है. 

बांग्लादेश के चुनावी समीकरण पर एक नजर 
1. संसद (जातीय संसद): 300 सीटें
2. बहुमत का आंकड़ा: 151
3. मतदान का दिन : 12 फरवरी 2026
4. वोटिंग का समय: सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक
5. चुनाव के नतीजे: 13 फरवरी
6. कुल 59 पंजीकृत राजनीतिक दल इस चुनाव हिस्सा ले रहे हैं.
7. प्रमुख दलों में बीएनपी के नेतृत्व वाला 10 पार्टी वाला गठबंधन और एनसीपी और जमात के नेतृत्व वाला 11 दलों वाला गठबंधन शामिल है. 
8. चुनावी मैदान में कुल 1981 उम्मीदवार हैं. इनमें करीब 1700 उम्मीदवार राजनीतिक दलों से हैं और 249 निर्दलीय हैं. 
9. 63 महिला उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों से मौका दिया गया है, जबकि करीब 13 महिला उम्मीदवार निर्दलीय हैं. 
10. कुल वोटर: 12.77 करोड़

मतदाता एक साथ डाल रहे दो वोट 
बांग्लादेश चुनाव में इस बार मतदाता एक साथ दो वोट डाल रहे हैं. एक वोट संसदीय चुनाव के लिए और दूसरा वोट जुलाई चार्टर रेफरेंडम के लिए डाल रहे हैं. वोटिंग बैलेट पेपर पर हो रही है. संसदीय चुनाव के लिए सफेद बैलेट और जुलाई चार्टर रेफरेंडम के लिए रंगीन बैलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है. चुनाव के बाद काउंटिंग शुरू होगी. चुनाव परिणाम शुक्रवार को घोषित किए जाएंगे. 

पीएम पद के लिए दो प्रमुख उम्मीदवार 
यूनुस सरकार ने पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन लगा दिया है. इसके चलते यह पार्टी इस बार चुनाव में नहीं लड़ रही है. इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए दो उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. एक तरफ जहां पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान पीएम पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री पद के लिए शफीकुर रहमान, जो कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी (बांग्लादेश में 'जमात' के नाम से जाना जाता है) के अमीर हैं अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तारिक रहमान इस चुनाव में सबसे आगे माने जा रहे हैं. रहमान ने नौकरियां देने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बोलने की आजादी जैसे वादे करके जनता को लुभाने की कोशिश की है.

मुख्य मुकाबला BNP और जमात में
इस चुनाव में दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद इरशाद की जातीय पार्टी, चार लेफ्टिस्ट पार्टियां और सैयद मुहम्मद रेजाउल करीम का इस्लामिक मूवमेंट, जिसे चारमोनैर पीर के नाम से जाना जाता है चुनावी मैदान में हैं. हालांकि ओपिनियन पोल करने वालों का अनुमान है कि मुख्य मुकाबला BNP गठबंधन और जमात के नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन (जिसमें नाहिद इस्लाम और जुलाई मूवमेंट के नेताओं के एक हिस्से द्वारा बनाई गई नई नेशनल सिटिजन्स पार्टी या NCP शामिल है) में ही है.

शेख हसीना के बेटे ने की चुनाव बॉयकॉट की अपील
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने इस चुनाव की आलोचना करते हुए इसे गैर-कानूनी बताया है और वोटरों से चुनावों का बॉयकॉट करने की अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के तहत कट्टरपंथियों को रिहा कर दिया गया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया है. सरकार ने हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया है.

क्या है जुलाई चार्टर 
इस बार नई सरकार चुनने के साथ-साथ वोटर जुलाई चार्टर पर भी फैसला कर रहे हैं. यह एक प्रस्तावित संवैधानिक सुधार पैकेज है. अंतरिम लीडरशिप के सपोर्ट से यह एग्जीक्यूटिव ताकतों को फिर से तय करने और अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश करता है. चार्टर के पास होने से बांग्लादेश में कई संवैधानिक संशोधन भी जरूरी हो जाएंगे. जुलाई चार्टर में प्रधानमंत्री के कार्यकाल को अधिकतम दो बार तक सीमित करने और एक स्थायी न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं.

13वें संसदीय चुनाव के साथ ही बांग्लादेश में जुलाई चार्टर पर भी रेफरेंडम रखा गया है. पिछले नवंबर में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के जारी किए गए ऑर्डिनेंस के मुताबिक रेफरेंडम चार मुद्दों पर एक सवाल पर आधारित होगा. जुलाई चार्टर में बताए गए प्रोसेस के हिसाब से केयरटेकर सरकार, इलेक्शन कमीशन और दूसरी संवैधानिक संस्थाएं बनाई जाएंगी. अगली संसद दो सदनों वाली होगी. नेशनल चुनाव में पार्टियों को मिले वोटों के हिसाब से 100 सदस्यों वाला एक अपर हाउस बनाया जाएगा और संविधान में बदलाव के लिए अपर हाउस के ज्यादातर सदस्यों की मंजूरी जरूरी होगी. चुनाव में जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को जुलाई नेशनल चार्टर में राजनीतिक पार्टियों के बीच सहमत हुए अलग-अलग मुद्दों पर 30 प्रस्तावों को लागू करना होगा, जिसमें पार्लियामेंट में महिलाओं का रिप्रेजेंटेशन बढ़ाना, डिप्टी स्पीकर और पार्लियामेंट्री कमेटी के चेयरपर्सन को विपक्ष से चुनना, प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित करना, प्रेसिडेंट की शक्तियां बढ़ाना, फंडामेंटल राइट्स को बढ़ाना, ज्यूडिशियरी और लोकल गवर्नमेंट की आजादी शामिल है. जुलाई चार्टर में बताए गए दूसरे सुधार पॉलिटिकल पार्टियों के वादे के मुताबिक लागू किए जाएंगे.