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Corporate Trend:8 घंटे की शिफ्ट, लेकिन काम सिर्फ 3 घंटे, चौंकाने वाली स्टडी में हुआ खुलासा, जानें बाकी समय आखिर कहां जाता है

क्या आप भी दिनभर ऑफिस में खुद को व्यस्त महसूस करते हैं? एक ताजा रिसर्च ने ऑफिस कर्मचारियों के काम करने के तरीके पर चौंकाने वाला दावा किया है. स्टडी के अनुसार, 8 घंटे की शिफ्ट में एक कर्मचारी औसतन केवल 2 घंटे 53 मिनट ही असल में काम करता है.

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आज की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग दिनभर ऑफिस में समय बिताते हैं, लेकिन एक हालिया स्टडी ने स्टाफ के काम करने के तरीके पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक कर्मचारी पूरे दिन में औसतन सिर्फ 2 घंटे 53 मिनट ही प्रोडक्टिव काम करता है, यानी 8 घंटे की नौकरी में ज्यादा समय कहां जाता ये सवाल खड़ा हो रहा है. आज हम इसी स्टडी में इस सवाल का जबाव खोजेंगे. 

स्टडी में क्या आया सामने
यह स्टडी UK के करीब 2 हजार ऑफिस कर्मचारियों पर की गई, जिसमें उनकी रोजमर्रा की आदतों और काम करने के तरीके को समझा गया. इसमें पाया गया कि 79% लोगों ने खुद माना कि वह पूरे दिन लगातार काम पर फोकस नहीं कर पाते. वहीं सिर्फ 21% लोगों ने कहा कि वह शुरुआत से अंत तक प्रोडक्टिव रहते हैं.

आखिर समय जाता कहां है?
रिपोर्ट में सबसे बड़ा कारण सामने आया डिस्ट्रैक्शन. यही वजह है कि लोग ऑफिस में तो पूरा समय बिताते हैं, लेकिन आउटपुट उतना नहीं दे पाते जितना उम्मीद की जाती है. पूरे ऑफिस टाइम में वह,

  • सोशल मीडिया चेक करना - 47%
  • न्यूज़ वेबसाइट पढ़ना - 45%
  • सहकर्मियों के साथ काम के अलावा दूसरी बातें करना - 38%
  • चाय/कॉफी बनाना - 31%
  • स्मोकिंग ब्रेक लेना - 28%
  • टेक्स्ट या इंस्टेंट मैसेज करना - 27%
  • स्नैक्स खाना - 25%
  • ऑफिस में खाना बनाना - 24%
  • पार्टनर या दोस्तों को कॉल करना - 24%
  • नई नौकरी ढूंढना - 19%

खास बात यह है कि सिर्फ खाने-पीने और चाय के ब्रेक में ही काफी समय चला जाता है. औसतन कर्मचारी रोज करीब 25 मिनट सिर्फ स्नैक्स और ड्रिंक्स तैयार करने और उन्हें खाने-पीने में खर्च कर देते हैं. 

'बिजी दिखना' बन गया नई आदत
आजकल एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है, जिसे 'प्रोडक्टिविटी का दिखावा' कहा जाता है. यानी लोग असल में काम कम करते हैं, लेकिन खुद को व्यस्त दिखाने की कोशिश ज्यादा करते हैं. इससे न सिर्फ काम की गुणवत्ता पर असर पड़ता है, बल्कि समय भी बेकार होता है.

क्या बदल रही है काम करने की सोच?
इस स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ घंटों तक ऑफिस में बैठना ही प्रोडक्टिविटी नहीं है. अब कंपनियां भी इस बात को समझने लगी हैं कि कम समय में बेहतर काम करना ज्यादा जरूरी है. यही वजह है कि दुनिया भर में वर्किंग स्टाइल को लेकर नए एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं.

क्या है इसका असर?
कम प्रोडक्टिविटी का असर सिर्फ कंपनी पर नहीं, बल्कि कर्मचारियों पर भी पड़ता है. इससे तनाव बढ़ता है, कई बार काम का दबाव महसूस होता है और कई बार काम अधूरा रह जाता है. वहीं, अगर फोकस्ड तरीके से काम किया जाए, तो कम समय में ज्यादा बेहतर रिजल्ट मिल सकता है.

इस पूरी रिपोर्ट से एक बात साफ है कि काम के घंटे नहीं, बल्कि काम की क्वालिटी मायने रखती है. अगर ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी बनाई जाए और फोकस बढ़ाया जाए, तो वही 8 घंटे का दिन ज्यादा असरदार बन सकता है.

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