Venezuela Economic Crisis
Venezuela Economic Crisis
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर यूएस आर्मी ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है. अमेरिका की इस एकतरफा सैन्य कार्रवाई की दुनिया के अधिकांश देश आलोचना कर रहे हैं, जो सही भी है, लेकिन आपको वेनेजुएला की बर्बादी की इनसाइड स्टोरी भी जाननी चाहिए.
कभी दुनिया के अमीर देशों में वेनेजुएला की गिनती होती थी, फिर अर्श से फर्श पर कैसे आया यह देश? आइए जानते हैं तेल का अकूत भंडार होने के बावजूद आज यहां के लोग दाने-दाने को मोहताज क्यों हैं? आज 80 प्रतिशत वेनेजुएला के नागरिक अर्जेंटीना, कोलंबिया या ब्राजील में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं.
कभी लैटिन अमेरिका में सबसे तेजी से तरक्की करता हुआ देश था वेनेजुएला
वेनेजुएला कभी लैटिन अमेरिका में सबसे तेजी से तरक्की करता हुआ देश था. दुनिया के अमीर देशों में वेनेजुएला की गिनती होती थी. दुनिया भर के लोगों का सपना होता था वेनेजुएला में जाकर जॉब करना और वहां रहना. दुनिया को कई मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स वेनेजुएला ने दिए हैं. कभी यहां के समुद्र तटों पर सैलानियों की भीड़ रहती थी. वेनेजुएला की राजधानी काराकस ही नहीं बल्कि इस देश के अन्य शहरों की सड़कों पर लग्जरी कारें दौड़ती थीं.
यहां के लोगों का पास इतना पैसा था कि वे वीकेंड पर शॉपिंग करने के लिए वेनेजुएला से प्लेन पकड़कर मियामी जाते थे. महंगे स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन खरीद कर पीते थे. यहां के लोगों के पास इतना पैसा इसलिए था कि क्योंकि इस देश में तेल का अकूत भंड़ार था. आज भी तेल का भंडार है. दुनिया के 10 सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में वेनेजुएला आज भी पहले स्थान पर है. फिर आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि तेल भंडार रहते हुए भी यह देश कंगाल हो गया. इसको जानने से पहले थोड़ा और जानते हैं वेनेजुएला की चमकी किस्मत के बारे में.
...तो वेनेजुएला की हो गई चांदी
दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया के अधिकांश देश आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे. उस समय जमीन के नीचे से निकलने वाले तेल ने वेनेजुएला की किस्मत चमका दी थी. वेनेजुएला तेल के बदौलत 1952 में दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बन गया था. कई बड़े-बड़े उद्योगपति तेल व्यवसाय से जुड़े थे. वेनेजुएला की ही पहल पर ही सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत ने हाथ मिलाया था और सितंबर 1960 में ओपेक (OPEC) की स्थापना हुई थी.
पूरी दुनिया में जब 1970 के दशक में तेल संकट आया और कीमतें आसमान छूने लगीं, तब वेनेजुएला की चांदी और हो गई. यहां के लोगों को लगने लगा कि अब मेहनत करने की जरूरत क्या है, जब तेल से अथाह पैसा आ रहा है. उस समय यहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आय दुनिया के कई विकसित देशों से भी ज्यादा थी. वेनेजुएला सरकार ने 1976 में तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया और सरकारी कंपनी PDVSA बनाई. यह कंपनी उस समय दुनिया की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली तेल कंपनियों में से एक बन गई.
दुनिया के 10 सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश
1. वेनेजुएला: 303 बिलियन बैरल
2. सऊदी अरब: 267 बिलियन बैरल
3. ईरान: 209 बिलियन बैरल
4. कनाडा: 163 बिलियन बैरल
5. इराक: 145 बिलियन बैरल
6. यूएई: 113 बिलियन बैरल
7. कुवैत: 102 बिलियन बैरल
8.रूस: 80 बिलियन बैरल
9. अमेरिका: 74 बिलियन बैरल
10. लीबिया: 48 बिलियन बैरल
... और शुरू हुआ ऐसे वेनेजुएला की बर्बादी का खेल
वेनेजुएला ने तेल बेचकर खूब पैसा कमाया लेकिन इस देश ने अपनी दौलत का ऐसा मिसमैनेजमेंट किया कि आज यह देश कंगाल हो गया है. आइए जानते हैं वेनेजुएला की बर्बादी की कहानी. ह्यूगो शावेज ने जब 1999 में वेनेजुएला की सत्ता संभाली तभी से यहां की बर्बादी की कहानी शुरू हो गई. रही-सही कोर-कसर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन में पूरी हो गई.
कई उद्योगपति वेनेजुएला छोड़कर चले गए
हुगो शावेज ने वेनेजुएला की सत्ता देश की जनता को भड़का कर लिया था. हुगो शावेज ने वेनेजुएला के लोगों को भड़काना शुरू किया था उद्योगपति देश को लूट रहे हैं. वेनेजुएला के बड़े तेल कंपनियों के मालिकों का नाम लेकर लोगों को भड़काना शुरू किया था. उसने लोगों को यह कह कर उकसाया कि सभी तेल के कुएं देश के बड़े उद्योगपतियों को ही दिए जा रहे हैं. ये उद्योगपति जनता की न सोच कर सिर्फ अपना मुनाफा करने में लगे हैं. सरकार भी इन उद्योगपतियों का साथ दे रही है.
हुगो शावेज कहता था कि वेनेजुएला के पास इतना तेल है कि हम यदि तेल का निर्यात कम करके अपने ही देश में बेचे तो हम आधे सेंट प्रति लीटर तेल बेच सकते हैं और तेल की कमाई से हम हर परिवार को 10000 बोलिवर (वेनेजुएला की करेंसी) महीना तक दे सकते हैं. वेनेजुएला की जनता को भी लगने लगा कि हुगो शावेज बहुत अच्छी बात कह रहा है. वहां की जनता ने चुनाव में हुगो शावेज का अपना राष्ट्रपति चुन लिया. हुगो शावेज कम्युनिस्ट विचारधारा का था. उसने सत्ता संभाली तो तेल की ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर खूब सब्सिडी लागू किया. प्राइवेट कंपनियों को सरकारी बना दिया. इसके कारण कई बड़े उद्योगपति वेनेजुएला छोड़कर चले गए. PDVSA में काबिल इंजीनियरों को हटाकर राजनीतिक वफादारों को भर दिया गया. इससे तेल उत्पादन की तकनीक खराब हो गई और देश के 60 लाख से ज्यादा पढ़े-लिखे लोग देश छोड़कर चले गए. PDVSA से अरबों डॉलर गायब हुए. नेता, सैन्य अधिकारी और उनके करीबी परिवारों ने खूब लूट मचाई. न्यायपालिका, संसद और चुनाव आयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण हो गया.
दूसरे बिजनेस पर ध्यान ही नहीं दिया
वेनेजुएला सिर्फ तेल निकालने पर ध्यान देने लगा. उसने खेती, फैक्ट्री और दूसरे बिजनेस पर एकदम ध्यान ही नहीं दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि सूई-धागे से लेकर खाने-पीने की चीजों तक के लिए वेनेजुएला दूसरे देशों पर निर्भर हो गए. वह तेल के बदले सामान खरीदने लगा. उसने देश की जनता को खुश करने के लिए उन्हें पैसे देना शुरू कर दिया.
फिर घर बैठे पैसा मिलने पर वेनेजुएला के लोगों ने भी काम करना बंद कर दिया. हुगो शावेज सरकार ने देश के भविष्य के लिए पैसा निवेश करने के बजाय मुफ्त योजनाओं में पैसा उड़ा दिया. जब तक तेल महंगा था, सब ठीक चलता रहा, लेकिन जैसे ही तेल की कीमतें गिरीं, सरकार के पास कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे. सरकार ने घाटा भरने के लिए मुद्रा छापना शुरू किया. इससे हाइपरइन्फ्लेशन शुरू हुआ, जो 2018 में इतन बढ़ गया कि लोग भुखमरी के शिकार तक होने लगे. वेनेजुएला सरकार को यह समझ में नहीं आया कि नोट छापना गरीबी मिटाने का हल नहीं है.
दुनिया भर के देशों से दुश्मनी लेना शुरू कर दिया
हुगो शावेज ने इसके बाद दुनिया भर के देशों से दुश्मनी लेना शुरू कर दिए. तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा. वेनेजुएला में धीरे-धीरे सारी फैक्ट्रियां बंद हो गईं. बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई. सब कुछ बर्बाद हो गया. तानाशाह हुगो शावेज मरने के पहले अपना उत्तराधिकारी निकोलस मादुरो को तय करके गया. मार्च 2013 में शावेज की मौत के बाद मादुरो अंतरिम राष्ट्रपति बने. निकोलस मादुरो के शासन में देश में खूब अव्यवस्था फैली और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया. निकोलस मादुरो ने देश में कभी भी सही से चुनाव होने नहीं दिया. वह हर बार खुद राष्ट्रपति बना. अब ट्रंप सरकार का दावा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और वहां के टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेंगी. हालांकि यह सबकुछ वेनेजुएला की नई सरकार पर निर्भर करेगा.