Abu Dhabi
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जब भी किसी कारण उड़ानें रुक जाती हैं, तो यात्रियों की चिंता बढ़ जाती है. हवाईअड्डों पर लंबी कतारें लगती हैं, होटल किराए अचानक आसमान छूने लगते हैं और लोग अनचाहे खर्चों के लिए खुद को तैयार करने लगते हैं. लेकिन मिडिल ईस्ट कॉन्फिक्ट के बीच अबू धाबी में तस्वीर बिल्कुल अलग रही. अफरातफरी की जगह वहां एक संवेदनशील पहल देखने को मिली, जिसने फंसे हुए यात्रियों के लिए वहां कुछ समय के लिए ठहरना पूरी तरह निशुल्क कर दिया.
अबू धाबी डिपार्टमेंट ऑफ कल्चर एंड टूरिज्म ने शहर के होटलों को निर्देश दिए कि जिन यात्रियों की उड़ानें रुक गई हैं, वे अपनी गलती के बिना रुकने को मजबूर हैं, इसलिए उनसे अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए. 28 फरवरी को जारी एक पत्र में होटल महाप्रबंधकों से कहा गया कि वे ऐसे मेहमानों को चार्ज न करें और बिल सीधे विभाग को भेजें. संदेश साफ था कि किसी भी यात्री को ऐसी स्थिति का आर्थिक बोझ नहीं उठाना चाहिए, जो उसके नियंत्रण से बाहर हो.
फौरन दिखा असर
इस फैसले का असर तुरंत दिखाई दिया. जहां आमतौर पर चेकआउट काउंटर पर तनाव और बहस का माहौल बन जाता है, वहां इस बार शांति और व्यवस्था देखने को मिली. कई होटलों ने मेहमानों को भोजन और ताज़गी की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई, ताकि वे उड़ानों की नई जानकारी मिलने तक आराम से इंतजार कर सकें.
होटलों आए फौरन एक्शन में
यूएई सिविल जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी के अनुसार, व्यापक रूप से उड़ान रद्द होने के बाद लगभग 20,000 यात्रियों को अस्थायी रूप से ठहरने की जरूरत पड़ी. आम तौर पर इतने बड़े स्तर पर कमरे, भोजन और व्यवस्थाएं जुटाने में कई दिन लग सकते हैं, लेकिन यहां यह काम लगभग रातोंरात पूरा हो गया. विभागीय टीमों ने सीधे होटलों के साथ समन्वय कर बिलिंग, कमरे आवंटन और अतिथि सहायता की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखा. यह पहल केवल अबू धाबी तक सीमित नहीं रही. पड़ोसी दुबई में भी समान निर्देश जारी किए गए, ताकि होटल मौजूदा बुकिंग शर्तों के तहत प्रवास बढ़ा सकें.
पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इज़राइल तनाव के कारण हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित होने से कई उड़ानें रद्द हुईं. ऐसे संवेदनशील समय में अबू धाबी का यह निर्णय केवल तत्काल राहत नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी विश्वसनीय छवि को मजबूत करने का संकेत भी है.